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पशु हो सकते है सर्पदंश के शिकार ! इसलिए ग्रामीण नहीं ले जा रहे गौठान !

जहाँ पंचायतें शौचालय और वृध्धा पेंशन तक की राशियों को ग़बन कर जाती है, वह पंचायत गौठान के लिए क्या करेगी ? बेजुबान जानवर, जहाँ लोग सरकारी योजना का पूरी तरह लाभ नहीं ले पा रहें है वहां योजना का लाभ मवेशियों तक कैसे पहुंचेगा ?

जिले में लगभग 50 से अधिक गौठान पुर्ण हो चुके है, मगर कितने गौठाना में सही तरीके से कार्यो का निर्वहन किया जा रहा है इसकी जानकारी नहीं है. जहाँ एक तरफ छत्तीसगढ़ में बने गोबर के दीयों से दिल्ली को जगमगाने की बात कही जा रही है, वहीं कई गौठान ऐसे भी है जहाँ गौठान बनाकर राजकीय कोष व्यर्थ किया जा रहा, जबकि गौठान बनने के बावजूद भी मवेशी अब तक सुरक्षित नहीं हो पाए है.


ऐसा ही एक गौठान है महासमुंद जिले के बसना ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत मेढ़ापाली के ग्राम ठुठापाली में यहाँ मॉडल गौठान का निर्माण किया गया है. इस गौठान की कुल लागत राशि करीब 20 लाख रुपये है, गौठान का निर्माण 3 एकड़ में किया गया है.


इस गौठान में  प्रतिदिन 70 से 80 पशु आने का दावा किया गया था, इसके साथ ही यहाँ घुरूवा योजना के तहत दो वर्मी बेड लगाए गए है, जिसमें गोबर एकत्र करने का काम एवं रख-रखाव जय गणेश महिला स्व सहायता समूह द्वारा करना बताया गया था.


मगर इस गाँव के गौठान में सारे किये दावे खोखले निकले, पशु गाँव की सड़कों पर है ना कि गौठान में, ग्राम पंचायत मेढ़ापाली के ग्राम ठुठापाली में बनाये गए इस मॉडल गौठान में ना तो पशुओं के लिए चारा है और ना पानी टंकी में पशुओं के लिय पानी. वीरान पड़े इस गौठान में ना ही गोबर एकत्र करने का कोई कार्य किया जा रहा और ना ही रख रखाव का.


वहीं इस मामले को हल्के में लेते हुए पंचायत सचिव का कहना है कि इस गौठान में पशु सर्पदंश के शिकार हो सकते है, अक्सर इस गौठान में नाग व डोमी सांप देखा गया है. जिसके कारण गाँव के लोग अपने पशुओं को गौठान में नहीं भेजते है.