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जानकारी ही बचाव, निःशुल्क इलाज और दवा लेकर एक-दूसरे को फ्लोरोसिस से बचायें

लंबे समय तक 01 पीपीएम से अधिक फ्लोराइड-युक्त पेय जल के सेवन अथवा खाद्य पदार्थाें में इसके आधिक्य से होती है, फ्लोरोसिस की समस्या निराकरण हेतु स्वास्थ्य विभाग चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है प्रयास


महासमुन्द 09 अक्टूबर 2019/फ्लोरोसिस एक जन-स्वास्थ्य समस्या है। इसके निदान का ध्येय लिये राष्ट्रीय स्तर पर पंचवर्षीय योजना अंतर्गत राष्ट्रीय फ्लोरोसिस रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीपीसीएफ) की नींव रखी गई, बहुतेरे राज्य इसमें शामिल हुये। प्रदेश स्तर पर भी इसे गंभीरता से लिया गया और अब महासमुंद जिला भी इस ओर ध्रुत गति से अग्रसर है। गत् वर्ष जिले में फ्लोरोसिस समस्या-ग्रस्त तकरीबन 32 गांव में काम हुआ। नवीन अनुसंधान एवं सर्वेक्षण अनुसार वर्तमान सत्र में पहले से दोगुने गांवों में निवारण का बीड़ा उठाया है। यह गैर संचारी रोगों की गंभीर समस्याओं में शुमार फ्लोरोसिस के रोग को जड़ से मिटाने के लिये जिले में स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत विशेषकर स्कूली बच्चों सहित सामुदायिक क्षेत्रों में फ्लोरोसिस की जांच कर रहा है। इसमें ग्रामीण अंचल में प्रशिक्षण और जनशक्ति-जागरूकता क्षमता निर्माण करते हुये पानी व पेशाब में फ्लोराइड की मात्रा के स्तर की निगरानी हेतु आयन मीटर जैसे प्रयोगशाला उपकरणों का उपयोग किया जाता है। प्रकरण निदान के लिये निःशुल्क नैदानिकी सुविधाओं में शल्य-चिकित्सा और पुनर्वास संबंधी सभी वांछनीय सुविधायें भी मुहैया कराई जा रही हैं।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एसपी वारे एवं सिविल सर्जन सह-अस्पताल अधीक्षक डॉ आरके परदल के नेतृत्व व जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री संदीप ताम्रकार के मार्गदर्शन में फ्लोरोसिस रोकथाम व निवारण दल को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें भारत के एकमेव विश्वसनीय संस्थान से प्रशिक्षण ले चुके फ्लोरोसिस नियंत्रण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ संजय दवे और उनके सहयोगी लैब टैक्नीशियन श्री ओम प्रकाश पटेल जैसे अनुभवी अधिकारी-कर्मचारियों का दल निष्ठापूर्वक निरंतर सक्रिय है। इनके द्वारा फ्लोरोसिस के लिये चिन्हांकित संवेदनशील क्षेत्रों में दौरा कर पेय जल की सैंपलिंग की जा रही है। एकत्र जल सरकारी अस्पतालों में आयरन मीटर की अत्याधुनिक मशीनरी से जांचा-परखा जाता है और सोरोसिस की मात्रा का आंकलन कर आगामी सुधार हेतु रिपोर्ट उच्च स्तर पर प्रेषित की जा रही है। साथ ही साथ फ्लोरोसिस पीड़ित मरीजों के लिये भी यहां जांच हेतु प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा निःशुल्क परामर्श, अत्याधुनिक लैब जांच, उपचार व दवा वितरण की भी पूर्ण व्यवस्था की गई है। इधर, विभाग का दूसरा अमला फ्लोरोसिस से बचाव हेतु लोगों को जागरूक करने  प्रयासरत है, ताकि पुराने मरीजों की यथाशीघ्र पहचान हो, उन्हें इलाज की बेहतर सुविधा मिले साथ ही गणमान्य नागरिकां को जागरूक कर प्रभावित होने से पहले ही वांछित चिकित्सकीय सेवायें उपलब्ध कराई जा सकें। बताया गया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत फ्लोरोसिस से प्रभावित मरीजों को संपूर्ण निशुल्क इलाज मुहैया कराया जाएगा सभी से अपील की गई है कि यदि किसी व्यक्ति को फ्लोरोसिस की शिकायत हो तो वे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर सकतें है।

बताया गया कि दंत फ्लोरोसिसः के तहत दांत चॉक के जैसे सफेद हो जाते हैं या उन पर सफेद, पीले, भूरे या काले रंग के धब्बे सहित ऊपरी परत पर धारियां भी पड़ सकती हैं। स्केलेटल फ्लोरोसिसः के तहत शरीर के प्रमुख जोड़ों जैसे गर्दन, रीढ़ की हड्डी, कंधे, कूल्हे और घुटनों के जोड़ों को प्रभावित करता है। मुड़ाव, तेज दर्ज या जकड़न जैसी पीड़ा सहित गंभीर विकलांगता की वजह भी बन सकता है। नॉन-स्केलेटल फ्लोरोसिसः के तहत गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल शिकायतों के रूप में आरंभिक लक्षणों के तौर पर सामने आता है। अन्य रोगों को छुपा देता है, जिससे गलत इलाज की संभावना बढ़ जाती है। इसके निवारण हेतु लक्षण पहचान कर बिना देर किये चिकित्सक से परामर्श व उपचार लें। समय-समय पर मूत्र में फ्लोराइड की जांच करायें,. चिकित्सक परामर्श से कैल्सियम, विटामिन सी और डी जैसी दवांयें दी जा सकती, परंतु आहार संबंधी हस्तक्षेप सर्वोतम है इसके अलावा सुतंलित आहार-विहार सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। साथ ही उच्च फ्लोराइड मात्रा वाले खाद्य पदार्थों से बचें, साग-भाजी व प्रोटीन-विटामिन युक्त आहार ही खायें, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलायें पोषक आहार की मात्रा बढ़ायें, खाद्य तेल और मांसाहार, घी या मक्खन इत्यादि का उपयोग कम से कम करें, अधिक वजन और मोटापे से बचने के लिए आवश्यकता से अधिक न खाएं, अत्यधिक नमक व चीनी का सेवन न करें, सुरक्षित और स्वच्छ भोजन लें,. पानी खूब पीएं और शीतल पेय आदि ज्यादा मात्रा में न लें, शारीरिक सक्रियता के लिए नियमित रूप से हल्का व्यायाम अवश्य करें।