news-details

अगर पुलिस ताकतवर के आगे मजबूर है, तो उसे कोई हक नही मजबूर के आगे ताकतवर बनने का – पुलिस अधीक्षक श्री जीतेन्द्र शुक्ला.

"अगर पुलिस ताकतवर के आगे मजबूर है, तो उसे कोई हक नही मजबूर के आगे ताकतवर बनने का" ये शब्द थे महासमुंद के पुलिस अधीक्षक श्री जितेंद्र शुक्ला जी के जो 13 नवंबर 2019 को बसना थाने में जन समस्या निवारण शिविर को समाप्त करने के बाद प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहीं ।

करीब 1:30 घंटे से अधिक चली इस प्रेस वार्ता सह परिचर्चा सत्र में अधीक्षक महोदय ने जहां अपने मन की बातें रखीं वही स्थानीय पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने स्थानीय समस्याओं के बारे में जाना और उनके तत्काल निराकरण के लिए थाना प्रभारी को निर्देशित भी किया ।

पुलिस अधीक्षक श्री शुक्ला ने लगभग सभी सामाजिक मुद्दों जैसे मजदूर पलायन, प्राइवेट बसों में नियमो के उल्लंघन, अवैध शराब बिक्री नशे के समान की तस्करी आदि अनेक विषय मे न सिर्फ बेबाकी से अपना पक्ष रखा बल्कि नियमो का उलंघन करने, कानून हाथ में लेने वालों और नीति विरुध कार्य करने वालों के ऊपर तत्काल कड़ी से कड़ी कार्यवाही की बात कही ।

 अधीक्षक मोहदय से चर्चा के दौरान सौम्य रंजन जी ने कुछ प्रश्न किये -

जन सामान्य के बीच जाकर समस्या का निराकरण करने का ये प्रयास जो पिछले 3 महीनों से आप कर रहे हैं, इसमें आपको कितना सकारात्मक परिणाम मिला है ?  

जिसके उत्तर में अधीक्षक श्री शुक्ल ने कहा मैं सकारात्मक पुलिस आचरण में विश्वाश रखता हूँ , मेरा प्रयास रहता है , लोगो को थानों में सही व्यवहार के साथ सही सलाह और न्याय मिले कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के प्रति उनके मन विश्वाश बढ़े , इस प्रयास में काफी सफलता भी मिल रही है , जिस भी थाने में दूसरी या तीसरी बार जाना हुआ हैं , वह आशा अपेक्षा से अधिक सकरत्मक परिणाम मिले हैं और समस्याओं में 60 प्रतिशत तक कमी हुई है ।

आपने इसके सुकमा और नारायणपुर जैसे दूरस्थ धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्य किया है , जिनकी भोगौलिक और सामाजिक दोनों परिस्थितयां इस जिले के परिस्थितियों से अलग थी आप को दोनों परिवेश में कितनी भिन्ननता लगती है और दोनों परिवेश की क्या चुनौतियों है ?

उत्तर देते हुए पुलिस अधीक्षक जी ने कहा नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उनका कार्य करने के अनुभव ने उन्हें बहोत मजबूत और दृढ़ बनाया उनके अब तक के प्रशाशनिक कार्य क्षेत्र का स्वर्णिम सेवा काल उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बिताया है , साथ ही उन्हों ने बताया कि , कैसे क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेल के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्र के युवाओं को उन्होंने मुख्यधारा से जोड़ा और नक्सलवाद से लड़ने में उनकी सहायता की और ली । उन्होंने ये भी कहा शांत क्षेत्र की अपनी समस्या है , जैसे अवैध शराब , नशे का कारोबार , सड़क दुर्घटनाएं आदि और इन्हें रोकने और शातिर अपराधियों का पकड़ना भी रोचक अनुभव है ।

युवाओं और स्कूली छात्रों को नशे की लत से बचाने और दुर्व्यसनों से बचने क्या पुलिस और सामाजिक सहयोग से कोई सकारात्मक प्रयास किया जा सकता है ?

इसके जवाब में श्री शुक्ला जी ने कहा वे इसके लिए 2 चीजें करना का प्रयास कर रहे हैं ,पहला वे एक कार्यक्रम की रूप रेखा खींच रहे है , जिसके अंतर्गत वे जिले के सारे महाविद्यालयों में जा कर छत्रों से आमने सामने चर्चा परिचर्चा के माध्यम से नशे के विरुद्ध जागरूक करने साथ उनमें जीवन मे आगे बढ़ने के लिये एक प्रेरक प्रयास करने को भी प्रेरित करेंगे।

दूसरा - उन्होंने कहा कि वे कुछ अनुभवी अधिकारियों की एक टीम बना रहे हैं , जो स्कूलों में जाकर 10वीं और 12 कक्षा के छात्रों को नशे के नुकसान , ट्रैफिक नियमों के पालन नैतिक आचरण इंटरनेट मोबाइल के माध्यम से होने वाली फ़र्ज़ी घटनाओ आदि के प्रति जागरूक बनाने का कार्य करेगी ।

ज्ञात हो कि पुलिस अधीक्षक मोहदय श्री जब से प्रभार में जिले में आये हैं , प्रत्येक सप्ताह एक दिन जा कर अधीनस्थ किसी न किसी थाने में जन समस्या निराकरण शिवर लगा कर सीधे लोगों को सहायता का एक सकरत्मक प्रयास कर रहे हैं , जो अनुकरणीय है ।

श्री शुक्ला से मिलकर ये अनुभव हुआ कि वे सही मायनों में जो लोगों के प्रति प्रबल सेवा भाव, समर्पण, साहस और उत्साह के साथ अपनी टीम की कमान संभाल कर उसका नेतृत्व करने का प्रयास करने के साथ- साथ विशेष रूप से, तेजी से बदलते हुए सामाजिक और आर्थिक परिवेश के साथ, उनमें उच्च स्तरीय अखंडता, लोगों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदना , मानव अधिकारों का सम्मान, कानून और न्याय के प्रति अधिक उदार परिप्रेक्ष्य, पेशेवर होने के उंचे मानक, शारीरिक फिटनेस में अव्वल है । प्रारंभिक परिचर्चा ने तो उनकी यही रूप रेखा खींची है , भविष्य में देखना रोचक होगा कि प्रारंभिक आकलन से उनका व्यक्तित्व कितनी समानता रखेगा.