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बड़े सरकारी भवनों में भी नहीं लगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, जहां लगे वो काम के नहीं

रायगढ़:- जल संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना जरूरी है। इसे लगाने बाध्यता भी है लेकिन कलेक्टोरेट, निगम निगम दफ्तर और मेडिकल कालेज अस्पताल भवन जैसी बड़े भवनों में सिस्टम्स लगाए नहीं गए हैं। जहां लगे हैं वहां कहीं पाइप टूटा हुआ है तो कहीं शॉक पिट नहीं बना है। 1200 वर्गफीट या उससे बड़े आकार वाले भवनों के निर्माण की नगर निगम निर्माण की अनुमति देने के नाम पर 55 रुपए प्रतिवर्ग फुट शुल्क जमा कराती है लेकिन अब तक अफसर एक भी भवन पर सिस्टम लगवा नहीं पाए हैं। अफसर इसकी जरूरत और नियम तो बताते हैं लेकिन सिस्टम लगे क्यों नहीं इसपर अपनी मजबूरी बताते हैं।

निगम वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए शुल्क ले रहा है। भवन निर्माण की अनुमति मिले इसके लिए बाकायदा वाटर हार्वेस्टिंग शुल्क निगम में जमा कराया जाता है। तीन सालों में भवन निर्माण लाइसेंस के जरिये नगर निगम के खाते में वाटर हार्वेस्टिंग व प्लांटेशन के मद में 34 लाख ‌Rs.32 हजार आए|शेष पेज 18


शहर में सिर्फ 3 कालोनियों में ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जबकि ज्यादातर घरों में सिस्टम लगे ही नहीं हैं। निजी भवनों की तो छोड़िए सरकारी दफ्तरों और कालोनियों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाए गए हैं।


इसलिए जरूरी है वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

इस सिस्टम में मकान के आसपास एक सोख्ता गड्ढा बनाकर इसे मकान की छत से पाइप के सहारे जोड़ा जाता है। इस पर अधिक से अधिक 15 से 20 हजार रुपए खर्च होते हैं। इस सिस्टम से बारिश के दौरान मकान की छत का पानी गड्ढे में चला जाता है। इससे आसपास के जल स्रोतों हैंडपंप और ट्यूबवेल के जलस्तर में बढ़ोतरी होती है। पानी की समस्या से छुटकारा मिलता है। केन्द्रीय भूजल सर्वेक्षण के रिपोर्ट के अनुसार रायगढ़ में साल 2010 में भूजल 150 फीट नीचे आसानी से मिलता था, लेकिन 2017 में यही 255 फीट नीचे चला गया। साल 2016 में यह 240 फीट पर था। 


जिन अफसरों व विभागों पर जिम्मा है उन्हीं के भवनों में सिस्टम इंस्टाल नहीं

नगर निगम. नगर पालिक निगम की बिल्डिंग में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बना हुआ है। छत से पाइप निकाला गया है लेकिन इसे सोख्ता गड्ढे से जोड़ा नहीं गया है। बारिश में छत से पानी सोख्ता गड्ढे की बजाय नालियों में बह जाता है।

अनिवार्य है नए घरों के लिए यह सिस्टम लगवाना

कलेक्टोरेट . कलेक्टोरेट की छत से हर साल लाखों लीटर पानी नाली में बह जाता है। यहां सोख्ता गड्ढा तो बना है, पाइप निकला हुआ है, लेकिन छत पर लगे पाइप से इसे जोड़ा नहीं गया है। पिछले कई सालों से यही हाल है लेकिन अफसर ध्यान नहीं दे रहे।

वर्ष 2009 से शासन ने सभी नगरीय निकायों में नए भवन के निर्माण के साथ ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगाना अनिवार्य किया है। अनुज्ञा जारी करते समय नपा द्वारा अमानत राशि के रूप में जमीन के साइज के हिसाब से राशि जमा कराई जाती है। वाटर हार्वेस्टिंग के फोटोग्राफ्स आवेदन के साथ जमा करने होते हैं, जिसके बाद पैसा वापस मिलता है।

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