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अनोखी परंपरा परिवार में हुई मौत तो तोड़ देते है घर

रायगढ़:- कोरवा जाति अपनी अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है। कई तरह की प्रथाएं यहां प्रचलित हैं जो आज के आधुनिक समाज से अलग जरूर हैं, लेकिन जितनी ये अलग उतनी ही रोचक। ऐसी ही एक अनोखी परंपरा कोरवा जाति सैकड़ों सालों से निभाती आ रही है। ये परंपरा है कुटुम्ब में किसी की भी मौत होने पर पुराने घर को तोड़कर नया आशियाना बनाना। हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत आश्रित ग्राम आमानारा की। यहां रहने वाले 4 दर्जन कोरवा परिवार सालों से इस अनोखी परंपरा को निभा रहे हैं। अनेकों सरकारी योजनाओं के बावजूद अभी भी आमानारा की पूरी कोरवा जाति शिकार से ही पेट भरती है। ये टूटी हुई दीवारें और  मकान कोरवा जाति की परंपराओं के निशान हैं। कोरवा जनजाति इसलिए शासन की योजना का लाभ लेकर आगे नहीं आ रहे कि पक्का मकान मिलने के बाद उन्हें अपनी परंपरा निभाने की आजादी नहीं मिलेगी।

इनकी सोच बदलने में और वक्त लगेगा   धरमजयगढ़ के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शासन की योजनाओं से आदिवासियों की दशा व दिशा बदलने के प्रयास हो रहे हैं। इनका असर भी हुआ है लेकिन सोच बदलने में अभी और वक्त लगेगा। नहीं बदलना चाहते यहां की कोरवा जनजाति अपनी जीवनशैली बदलने को तैयार नहीं है। सड़कें, सोलर पावर से बिजली, प्राथमिक शिक्षा और चिकित्सा के इंतजाम किए गए हैं। आवास योजना भी शुरु हो गई है। -प्रणय मिश्रा, डीएफओ, धरमजयगढ़ मौत के बाद घर को मानते हैं अपशकुन आमानारा से लेकर टेड़ासेमर, सलसेरा जैसे कोरवा बाहुल्य वन्य क्षेत्रों में तमाम कोरवाओं के घरौंदे मिट्टी के बने हैं। इस जाति की परंपरा रही है कि यदि घर में किसी की मौत हो जाए तो उस घर को अपशकुन मान तोड़ दिया जाता है और फिर बगल में मिट्टी का नया घर बना लिया जाता है।


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