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करोड़ों खर्च के बावजूद एक भी छात्र का मेडिकल या आईआईटी कॉलेजों में नहीं हुआ सलेक्सन

जिला प्रशासन की एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग के छात्रों के लिए मेडिकल, जेईई व आईआईटी की निशुल्क कोचिंग योजना मजाक बन कर रह गई है. 3 साल में 2 करोड़ 32 लाख रुपए से ज्यादा 250 छात्रों पर खर्च हो चुके हैं, लेकिन एक भी छात्र का मेडिकल या आईआईटी कॉलेजों के लिए सलेक्शन नहीं हो सका है. कोचिंग कराने का जिम्मा लेने वाले विभाग हर साल बदले, पर छात्रों की किस्मत नहीं बदली. अब 2019-20 के लिए फिर से 100 छात्रों को मेडिकल व आईआईटी की कोचिंग देने की तैयारी हो रही है.

इस सत्र में कोचिंग का जिम्मा शिक्षा विभाग को दिया गया. पहले कोचिंग की जिम्मा ट्रायबल विभाग को था. फिर जिला रोजगार विभाग उसके बाद दोबारा ट्रायबल विभाग को मिला अब नोडल एजेंसी शिक्षा विभाग को बनाया गया है. मेडिकल की कोचिंग कराने का जिम्मा दो साल तक भिलाई की शिव कोचिंग को दिया गया था. इस बार दिल्ली की विद्या मंदिर क्लासेस को इसकी जवाबदेही दी गई है.

बड़े सेंटर जाएं तो तैयारी पर इतने ही रुपए खर्च होंगे 

जिला प्रशासन निशुल्क कोचिंग योजना डीएमएफ (खनिज न्यास निधि) से संचालित हो रही है. बीते 3 साल में 2 करोड़ 32 लाख 32 हजार रुपए से ज्यादा गर्ल्स कॉलेज के छात्रावास का मरम्मत, कर्मचारियों के वेतन भत्ते, छात्रों की भोजन व्यवस्था, यूनिफार्म, दैनिक उपयोग सामग्री, खेल सामग्री और शिक्षण व्यवस्था में खर्च किया गया. इस हिसाब से देखें तो एक स्टूडेंट पर औसत1 लाख रुपए सालाना खर्च किया जा रहा है.

जबकि जानकार बताते हैं कि मेडिकल या इंजीनियरिंग संस्थानों की तैयारी के बड़े केंद्र राजस्थान के कोटा में दो साल के औसतन चार लाख और विशाखापट्‌टनम में 2 लाख रुपए तक खर्च होते हैं. दोनों सेंटरों में स्टूडेंट्स के सफल होने की संभावनाएं यहां से ज्यादा हैं. 

प्रशासन नें स्थानीय अफसरों को सौंपी है जिम्मेदारी

निशुल्क कोचिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने तेजस्विनी केंद्र में पढ़ाई और व्यवस्था आदि के मॉनिटरिंग के लिए प्रशासन द्वारा स्थानीय अफसर को जिम्मेदारी सौंपी है. जिसमें अपर कलेक्टर, जिपं सीईओ, सहायक कलेक्टर, महिला एवं बाल विकास अधिकारी और रायगढ़ जपं सीईओ शामिल हैं, लेकिन अफसर निरीक्षण करने पहुंचते ही नहीं हैं. वर्तमान में कोचिंग की जवाबदेही शिक्षा विभाग को सौंपी गई है.

जिला रोजगार अधिकारी नें कहा - पिछली बार समय पर कोचिंग संस्था का सलेक्शन नहीं हो पाया था इसलिए छात्रों को तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं मिला. इसकी वजह से सलेक्शन नहीं हो पाया. इस बार समय पर काम हुआ है. उम्मीद है छात्रों का सलेक्शन होगा. 


ऐसे छात्र होते हैं कोचिंग के लिए पात्र
प्रशासन की मेडिकल व आईआईटी की मुफ्त कोचिंग के लिए एसटी व एससी वर्ग के उन्हीं कैंडिडेट का चयन किया जाता है, जिन्होंने 12वीं बोर्ड में 70 प्रतिशत अंक अर्जित किए हों. ओबीसी व जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स को क्वालिफाई करने के लिए 80 प्रतिशत अंक पाना जरूर है. ब्लॉक शिक्षाधिकारियों के जरिए प्रचार प्रसार किया जाता है और छात्रों से आवेदन लिए जाते हैं. आवेदन आने के बाद शासन द्वारा गठित कमेटी इन आवेदनों की स्क्रूटनी कर साक्षात्कार के बाद चयनित छात्रों को मुफ्त कोचिंग देती है.