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पिथौरा में संचालित हैं भट्ठा दलालों के दर्जन भर कार्यालय, करीब 5 हजार लोग हो चुके है पलायन

पिथौरा. शहर के भीतर ही भट्ठा दलालों के दर्जन भर कार्यालय संचालित है और क्षेत्र के करीब 5 हजार लोग अब तक भट्ठा पलायन कर चुके हैं या उन्हें कराया जा चुका है. हालांकि इस वर्ष जिले की पुलिस प्रशासन द्वारा इस पलायन को मानव तस्करी के दायरे में लाकर धारा 370 की कार्यवाही करते हुए दलालों पर नकेल कसने का प्रयास किया है. बावजूद दलाल और उनके लोग आज भी सक्रिय हैं और अपने दफ्तरों से पलायन को अंजाम देने में लगे हुए हैं.

पिथौरा क्षेत्र में लंबे समय से दलालों द्वारा भट्ठा पलायन का कारोबार किया जा रहा है. जिले की मीडिया भी भट्ठा पलायन को लेकर सवाल खड़े करते रहा है तथा करीब आधा दर्जन मामले भी दर्ज किए हैं. बावजूद इसके बेख़ौफ़ तरीके से पिथौरा शहर में ही एक दर्जन कार्यालय संचालित हो रहे हैं. जहाँ पर पलायन होकर जाने वाले मजदूरों का लेखा- जोखा तैयार किया जाता है. दूसरे शब्दों के कहें तो मजदूरों को दी जाने वाली अग्रिम राशि की डायरी तैयार की जाती है जिसे वे अपनी भाषा मे पर्ची कहते है.

चुनाव के पूर्व बरती गई थी कड़ाई
गत दिनों सम्पन्न विधानसभा चुनाव के समय मजदूर पलायन को लेकर पुलिस प्रशासन शक्त नजर आ रही थी और चुनाव सम्पन्न होते तक मजदूरों का पलायन पूरी तरह रोक दिया गया था. किन्तु अब चुनाव सम्पन्न होने के बाद अब बेधड़क मजदूरों का पलायन कराया जा रहा है.
           
लोकसभा चुनाव होगी प्रभावित
आने वाले लोक सभा चुनाव में क्षेत्र के मजदूरों के पलायन हो जाने से चुनाव परिणाम भी प्रभावित हो सकता है,क्योंकि चुनाव के दिनों में क्षेत्र के मजदूर अन्य प्रदेशों के ईंट भट्ठों में होंगे.
     
गांवों में भी मौजूद है दलाल
क्षेत्र के गांवों में भी अब भट्ठा दलाल मौजूद है तथा लोगों को बड़ी तादाद में पलायन कराने में जुटे हुए हैं. क्षेत्र के ग्राम ठाकुरदिया खुर्द, दुरुगपाली, गिरना सहित दर्जनों गांव हैं जहाँ भट्ठा दलाल इस कारनामे को बेख़ौफ़ अंजाम देने में लगे हुए हैं.

ड्रेस कोड से हो रहा है काम
बस के ऊपर रखे एक ही तरह के दर्जनों बेग किसी ब्यवसाई अथवा आम यात्री की नही बल्कि उन पलायन करने वाले लोगों की है जो अन्य प्रदेश के ईंट भट्ठों में काम करने जा रहे हैं. उक्त बेग भट्ठा दलालों द्वारा वितरित किया गया है. जो इनका ड्रेस कोड है । तथा इन्हें अपने सामान को रास्ते मे ट्रेनों में पहचानने के लिए आसानी हो इस कारण इन बैगों को वितरित किया गया है.
 
बहरहाल क्षेत्र से अब तक करीब पांच हजार से भी अधिक लोग पलायन कर अन्य प्रदेश के ईंट भट्ठों में जा चुके हैं. किंतु इनका रिकार्ड न तो ग्राम पंचायतों के पास है  और न हि जनपद कार्यालय में ही दर्ज है.

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