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नक्सली हमले के बाद भाजपा नेताओं ने अपने सोशल साइट्स हैंडल को किया ब्लैक, देश में शोक की लहर, समय आभाव के चलते पुलिस नहीं दे पाई सुरक्षा ?

दंतेवाड़ा/नकुलनार में माओवादियों द्वारा मंगलवार दोपहर दंतेवाड़ा के भाजपा विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर हमला कर उनके वाहन को बारूद से उड़ा दिया. हमले में विधायक भीमा और सुरक्षा में लगे तीन पीएसओ सहित वाहन चालक शहीद हो गए. इस हमले के बाद देश भर में मातम के साथ आक्रोश के हालात बन गए.

जिसके बाद छत्तीसगढ़ भाजपा ने ऑफिशियल वेबसाइट के प्रोफाइल को ब्लैक कर दिया. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह समेत, राजेश मूणत, बृजमोहन अग्रवाल, रूपकुमारी चौधरी आदि भाजपा नेताओं ने भी अपने अपने सोशल साइट्स हैंडल को ब्लैक कर दिया है.

डीजीपी अवस्थी ने मीडिया से कहा कि बचेली थाना प्रभारी ने विधायक मंडावी से नक्सल हमले की आशंका से इस रूट का उपयोग करने से मना किए थे, लेकिन भीमा मंडावी नहीं मानें. समय आभाव के चलते उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा नहीं ​दिया जा सका, जिसका उन्हें खेद है.

उन्होंने बताया कि विधायक मंडवी जब किरंदुल से चुनावी सभा को संबोधित कर लौट रहे थे तो बचेली थाना प्रभारी ने उनसे डेढ़ मिनट तक बात की और उन्हें उस रास्ते से जाने से मना किया. साथ ही उन्हें खतरे की आशंका भी जताई, लेकिन मंडावी नही मानें. अगर ये रास्ता नहीं अपनाते तो उनकी जान बच सकती थी. इतने कम समय में सूचना मिलने के चलते आरओपी पार्टी की व्यवस्था नहीं किया जा सका. पूर्व सूचना मिलती तो इस घटना से बचा जा सकता था.

इधर, इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन कटघरे में नजर आ रही है. पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस घटना में षडयंत्र की बू बताया है. अगर तत्काल कार्यक्रम बदला तो नक्सली वहां इतनी जल्दी कैसे पहुंच गए ?

थाना प्रभारी के कहने पर डीजी जैसे अधिकारी गैरजिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं. 4 घण्टे में प्रशासन ने इतनी बड़ी घटना को मंडावी की गलती बना दी. महेन्द्र कर्मा के पुत्र छवींद्र कर्मा ने बताया उनको उस रास्ते मे जाने से रोका गया, लेकिन मंडावी को जाने दिया. इस बात से साफ जाहिर है कि इस घटना को षडयंत्र पूर्वक अंजाम दिया गया है.  



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