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वि.ख.पिथौरा अंतर्गत आश्रम शाला तरेकेला के शिक्षक ने अपनी जगह पर पढ़ाने के लिए कर दी एक महिला की नियुक्ति

बसना - सुदूर भर्ती ग्रामीण इलाकों में निवासरत जनजाति वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके इसलिए शासन द्वारा दूरस्थ अंचलों में आश्रम शालाओं की स्थापना कर करोड़ों रुपए में किया जा रहे हैं. लेकिन जिम्मेदार नौकरशाहों की लापरवाही और मनमानी के चलते जनजाति वर्ग के बच्चों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. 

दरअसल ऐसा ही मामला महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लाक अंतर्गत आने वाले ग्राम तरेकेला में सामने आया है जहां स्थापित आश्रम शाला में अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक ने अपनी जगह पर एक महिला को ही नियुक्त कर दिया है. ₹2000 के मासिक वेतन पर शिक्षक द्वारा नियुक्त किए गए महिला द्वारा बच्चों को किस तरह की शिक्षा दी जाती होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है बताया जा रहा है कि शिक्षक सप्ताह में 1 दिन स्कूल पहुंचकर अपनी हाजिरी चढ़ा देते हैं ऐसे में शासन की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ जनजाति वर्ग के बच्चों को कैसे मिलेगा यह काफी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है वहीं दूसरी ओर समाज के निचले तबके के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की जो प्रयास शासन द्वारा किया जा रहा है उस पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है.

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