किसानों के लिए एआई आधारित सेवाओं का विस्तार
केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई डिजिटल पहलें लागू कर रही है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय किसान परामर्श, कीट नियंत्रण, फसल पहचान, बीमा, सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण और प्रशासनिक विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित परियोजनाओं का उपयोग कर रहा है। डिजिटल कृषि मिशन के तहत राज्यों को एआई, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों से जुड़ी परियोजनाओं के लिए भी सहायता दी जा रही है।
राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली से फसल सुरक्षा
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) एआई और मशीन लर्निंग की मदद से फसलों में कीटों के प्रकोप का समय रहते पता लगाकर नुकसान कम करने में सहायता करती है। वर्तमान में 10,000 से अधिक कृषि विस्तार कार्यकर्ता इस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। यह 73 फसलों और 436 प्रकार के कीटों की निगरानी में सक्षम है तथा किसानों को कीटों की तस्वीर अपलोड कर त्वरित सलाह प्राप्त करने की सुविधा भी देती है।
एआई आधारित मौसम सलाह से 5.28 करोड़ किसानों को लाभ
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) एआई आधारित मानसून और मौसम संबंधी सलाह उपलब्ध करा रहा है, जिससे किसानों को स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्यों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है। सरकार के अनुसार, इस पहल से अब तक लगभग 5.28 करोड़ किसान लाभान्वित हो चुके हैं।
‘भारत विस्तार’ प्लेटफॉर्म से डिजिटल कृषि सेवाएं
सरकार का ‘भारत विस्तार’ प्लेटफॉर्म कृषि क्षेत्र के लिए एआई-संचालित डिजिटल सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के रूप में विकसित किया गया है। यह किसानों को वास्तविक समय और स्थान-विशिष्ट कृषि सलाह के साथ सरकारी योजनाओं और कृषि सहायता सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराता है।
सरकार के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म ने अब तक 3 लाख से अधिक किसानों को सेवाएं प्रदान की हैं और 72 लाख से अधिक किसान प्रश्नों का समाधान किया है। इसके माध्यम से केंद्र सरकार की 18 योजनाओं, फसल और पशुधन संबंधी सलाह, मौसम पूर्वानुमान, मंडी भाव, कीट एवं रोग पहचान, मृदा स्वास्थ्य संबंधी सुझाव और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कई माध्यमों और 10 भाषाओं में उपलब्ध सेवाएं
‘भारत विस्तार’ वेब पोर्टल, मोबाइल एप्लिकेशन, एआई चैटबॉट और समर्पित टेलीफोन लाइन के माध्यम से उपलब्ध है। टेलीफोन सेवा फिलहाल हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध है, जबकि चैटबॉट, वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन 10 भाषाओं में सेवाएं प्रदान करते हैं।
एआई के प्रभाव का अलग से मूल्यांकन नहीं
सरकार ने बताया कि एआई आधारित प्रौद्योगिकियों के प्रभाव का अलग से कोई व्यापक मूल्यांकन नहीं किया गया है। हालांकि, डिजिटल कृषि पहलों के लिए पिछले पांच वर्षों में लगातार बजट आवंटित किया गया है।
डिजिटल कृषि पर बढ़ता निवेश
सरकार के अनुसार, डिजिटल कृषि पहलों के लिए वर्ष 2022-23 में 60 करोड़ रुपए, 2023-24 में 450 करोड़ रुपए, 2024-25 में 763.88 करोड़ रुपए, 2025-26 में 758.56 करोड़ रुपए और 2026-27 में 502.40 करोड़ रुपए आवंटित किए गए। वहीं, इन वर्षों में क्रमशः 20.84 करोड़ रुपए, 119.44 करोड़ रुपए, 356 करोड़ रुपए, 596.10 करोड़ रुपए और 364.62 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
राज्यों को भी मिल रही तकनीकी और वित्तीय सहायता
सरकार ने कहा कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और मानव संसाधन के लिए वित्तीय सहायता भी दी जा रही है, ताकि छोटे और सीमांत किसानों सहित सभी किसानों की एआई आधारित तकनीकों और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।