महासमुंद : संयुक्त संचालक के निर्देशो के बाबजूद डीइओ ने रोका लिमगांव स्कूल का जांच प्रतिवेदन।
शासकीय मिडिल स्कूल लिमगांव में प्रधानपाठक के जगह में बाहरी युवक को 6500 रूपये मासिक मानदेय देकर अध्यापन कराने के चर्चित मामले में जांच पूरी होने के बाबजूद कार्रवाई आगे नही बढने से शिक्षा विभाग की कार्यशैली सवालो के घेरे में है।
संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा आरोपित कर्मचारियो के विरूद्व पृथक पृथक अभिमत सहित जांच प्रतिवेदन मांगे जाने के महीनो बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से स्पष्ट प्रतिवेदन प्रस्तुत नही किया गया है। इससे विभाग पर मामले को दबाने का आरोप लग रहे है।
गौरतलब है कि तात्कालीन सरायपाली एसडीएम हेमंत रमेश नंदनवार(आइएएस) के औचक निरीक्षण से खुलासा हुआ था। तात्कालीन प्रधानपाठक धनीराम चौधरी के स्थान पर बाहरी युवक जितेन्द्र साहू से नियमित अध्यापन कराया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान उपस्थित शिक्षको एवं दो एबीइओ ने पंचनामा और बयान में इसकी पुष्टि भी की थी।
शिकायतकर्ता विनोद कुमार दास की शिकायत पर गठित चार सदस्यीय दल ने जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपा। जिसे तात्कालीन डीईओ ने अनुशंसा सहित संभागीय संयुक्त संचालक को भेज दिया। इसके बाद 8 मई को संयुक्त संचालक ने आरोपित प्रकाशचन्द्र मांझी, देवरानायण दीवान, जितेन्द्र रावल, ठण्डाराम टिकूलिया, गिरधारी पटेल, दिनेश पटेल, और मनीष साहू के विरूद्व पृथक पृथक अभिमत सहित जांच प्रतिवेदन 18 मई तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। बाबजूद इसके अब तक कार्रवाई आगे नही बढा है।
जानकारी के अनुसार संकुल प्रभारी एवं संकुल समन्वयक ने बीईओ कार्यालय सरायपाली में लिखित रूप से बाहरी युवक द्वारा अध्यापन कराए जाने की सूचना दी थी। फिर भी ना तो इस पर रोक लगा, और ना भुगतान रोका गया। उल्टे लगभग एक वर्ष तक वेतन जारी रहा। जिससे पद के दुरूपयोग, शासन को आर्थिक क्षति तथा किसी को अनुचित लाभ पहुंचाने की आशंका गहरा गया है। सूत्रो का दावा है कि तात्कालीन बीईओ वर्तमान में डीईओ कार्यालय में सहायक संचालक पद पर पदस्थ है। जिसके कारण फाइल लंबित पडा हुआ है।
इस संबंध में महासमुन्द डीईओ बी.एल. देवांगन ने कहा कि संबंधित जांच फाइल मंगवाकर परीक्षण किया जाएगा और उसके आधार पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।