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सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को गांव वालों ने दी सजा, रस्सी से बांधकर जिंदा जलाया, एक की मौत

झारखंड के गुमला जिला और थाना के बसुवा अंबाटोली गांव में ग्रामीणों द्वारा 8 जून की रात 10 बजे बलात्कार के आरोप में दो युवकों पर पेट्रोल छिड़क आग लगा दी गयी। जिसमें बसुवा बरहा गांव के सुनील उरांव (22 वर्ष) की मौत हो गयी। वहीं पोकोटोली गांव के आशीष उरांव (20 वर्ष) बुरी तरह जल गया है, वह रांची के रिम्स में जीवन व मौत से जूझ रहा है।

बता दें कि अंबाटोली गांव के कुछ ग्रामीणों ने सुनील व आशीष को पहले रस्सी से बांधकर पीटा। फिर दुष्कर्म पीड़िता के घर के सामने दोनों युवकों पर पेट्रोल डाल आग लगा दी। आग लगाने के बाद टांगी (कुल्हाड़ी) से भी काटा गया। जिसके बाद पुलिस ने दोनों घायलों को रात के 11 बजे सदर अस्पताल गुमला पहुंचाया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रांची रेफर कर दिया गया। 9 जून की सुबह चार बजे सुनील की रांची में मौत हो गयी। पुलिस ने दुष्कर्म की शिकार लड़की को अपने संरक्षण में लेकर गुमला सदर अस्पताल में मेडिकल कराया है।

घटना के बाद 9 जून की सुबह सुनील उरांव की मौत की सूचना के बाद बरहा व पोकोटोली गांव के ग्रामीण उग्र हो उठे। बरहा गांव में करीब दो सौ ग्रामीणों ने बैठक की। फिर पारंपरिक हथियार लाठी, डंडा, टांगी, बलुवा लेकर अंबाटोली गांव पीड़िता लड़की के घर पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि पीड़िता लड़की के पिता व मां ने दूसरे गांव से 10 -12 ग्रामीण युवकों को बुलाकर उनके द्वारा सुनील व आशीष को पीटा गया और आग लगाया गया। इसलिए सुनील की मौत के बदले ग्रामीण दुष्कर्म पीड़िता व उसके परिवार के लोगों को मारना चाह रहे थे। साथ ही सुनील की हत्या में शामिल अन्य ग्रामीणों को भी पुलिस से पकड़ने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों के उग्र रूप को देखते हुए एसडीपीओ मनीषचंद्र लाल, इंस्पेक्टर मनोज कुमार, थानेदार विनोद कुमार, सब इंस्पेक्टर विमल कुमार, अन्य पुलिस अधिकारी, महिला व पुलिस जवानों ने उन्हें रोका। बताया जाता है कि अगर पुलिस ग्रामीणों को नहीं रोकती तो वे पीड़िता लड़की के घर पर हमला कर बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकते थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर पुलिस ने गांव में कैंप किया हुआ है।

जानकारी के अनुसार पीड़िता 17 वर्षीय किशोरी अपने माता पिता व फुआ के साथ शादी समारोह में भाग लेने के लिए भड़गांव अपने रिश्तेदार के घर गई थी। वहां से लौटने के दौरान बस टेंपो (ऑटो) व अन्य गाड़ी नहीं मिल रही थी। इसी दौरान पीड़िता के पिता ने मोटरसाइकिल से वसुआ आ रहे सुनील उरांव और आशीष उरांव को देखा और अपनी बेटी को घर लेते जाने को कहा। सभी एक ही गांव के होने के कारण पीड़िता के पिता ने विश्वास करते हुए बेटी को युवकों के साथ भेज दिया।

पीड़िता ने बताया कि रास्ते में सुनसान जगह पर सुनील व आशीष ने बाइक रोककर उसके साथ पारी-पारी से दुष्कर्म किया। लड़की विरोध करती रही। परंतु दोनों युवक नहीं माने। लड़की ने कहा कि हाथ जोड़कर विनती करने पर दुष्कर्म के बाद उसे घर छोड़ दिया।

घर पहुंचने के बाद उन्होंने अपने पिता को घटना की जानकारी दी। इसके बाद गांव के कुछ लोग उग्र हो गये और सुनील व आशीष के साथ मारपीट किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर पुलिस ने गांव में कैंप किया हुआ है।


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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