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सरकार का बड़ा फैसला, मक्खन, अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स का नहीं किया जाएगा आयात, देश में दूध की नहीं है कमी

पशुपालन एवं डेयरी मंत्री परशोत्तम रुपाला (Parshottam Rupala) ने शुक्रवार को यह स्पष्ट किया कि देश में मक्खन (Butter) जैसे डेयरी उत्पादों का आयात नहीं किया जाएगा बल्कि सरकार आपूर्ति बढ़ाने के लिए बड़े और अनटैप्ड डोमेस्टिक सेक्टर की मदद लेगी. रुपाला ने एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, इसमें कोई सच्चाई (डेयरी उत्पादों की किल्लत) नहीं है. आयात नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि देश में दूध की कमी नहीं है और सरकार इस ओर नजर बनाए हुए है.

डेयरी मंत्री ने कहा, मांग बढ़ गई है. हमारे यहां अप्रयुक्त क्षेत्र बहुत बड़ा है जिसका लाभ उठाने का प्रयास किया जाएगा. हम उचित प्रबंध करेंगे, चिंता की कोई बात नहीं है. उन्होंने किसानों और उपभोक्ताओं को बेफिक्र रहने को कहा.



किसानों को मिल रहे अच्छे दाम
डेयरी प्रोडक्ट्स के रिटेल प्राइस में बढ़ोतरी के बारे में उन्होंने कहा कि दामों को लेकर भी चिंता नहीं की जानी चाहिए और किसानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं. सरकार ने 8 अप्रैल को भारत द्वारा कुछ डेयरी उत्पादों के आयात की संभावना के बारे में रिपोर्ट को स्पष्ट किया कि देश जरूरत पड़ने पर डेयरी उत्पादों के आयात पर विचार कर सकता है क्योंकि पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत में दूध उत्पादन में ठहराव रहने के कारण ऐसी वस्तुओं की आपूर्ति में कमी है.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में दूध उत्पादन 2021-22 में 221 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष के 208 मिलियन टन से 6.25% अधिक था. एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, सिंह ने कहा था कि मवेशियों में लम्पी स्कीन रोग के कारण 2022-23 के वित्तीय वर्ष में देश का दूध उत्पादन स्थिर रहा, जबकि इसी अवधि में घरेलू मांग में 8-10% की बढ़ोतरी हुई क्योंकि महामारी के बाद मांग में तेजी आई.




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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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