मोदी सरनेम केस : राहुल की याचिका पर सुनवाई आज - CG Sandesh

मोदी सरनेम केस : राहुल की याचिका पर सुनवाई आज

अहमदाबाद. मोदी सरनेम केस में राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज जस्टिस बीआर गवई और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच सुनवाई करेगी। राहुल ने 15 जुलाई को मामले की अर्जेंट सुनवाई की याचिका लगाई थी।

कोर्ट ने 18 जुलाई को स्वीकार कर लिया था। उनसे पहले राहुल पर केस करने वाले भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने भी कैविएट दाखिल करके अपील की थी, उन्हें सुने बिना केस में फैसला न लिया जाए।

राहुल गांधी की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी पेश होंगे। अगर राहुल को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली तो वह 2031 तक कोई चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। नियम है कि सजा पूरी होने के छह साल बाद तक चुनाव लड़ने पर रोक रहती है। ऐसे में 2 साल की सजा और उसके बाद 6 साल 2031 में पूरे होंगे।

मानहानि केस में 23 मार्च 2023 को सूरत की सेशन कोर्ट ने राहुल गांधी को 2 साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद राहुल की सांसदी चली गई थी।

 


गुजरात हाईकोर्ट ने कहा था- सजा न्यायोचित

7 जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस हेमंत प्रच्छक ने कहा था, ‘राहुल के खिलाफ कम से कम 10 क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं। इस केस के अलावा उनके खिलाफ कुछ और केस फाइल किए गए हैं।

एक तो वीर सावरकर के पोते ने दायर किया है। किसी भी हाल में सजा पर रोक नहीं लगाना अन्याय नहीं है। इस केस में सजा न्यायोचित और उचित है।

राहुल गांधी ऐसे आधार पर सजा पर रोक की मांग कर रहे हैं, जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। सूरत कोर्ट के फैसले में दखल की आवश्यकता नहीं है। याचिका खारिज की जाती है।’

राहुल गांधी की याचिका हाईकोर्ट खारिज कर चुका है

7 जुलाई को गुजरात हाईकोर्ट ने मानहानि केस में राहुल की 2 साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा- इस केस के अलावा राहुल के खिलाफ कम से कम 10 केस पेंडिंग हैं। ऐसे में सूरत कोर्ट के फैसले में दखल देने की जरूरत नहीं है।


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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