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ग़बन के चलते बीते 5 वर्षों में 2 बार निलंबित हुए सरपंच असीम सोना, फिर भी नहीं मिल पाई हितग्राहियों को शौचालय की राशि.

स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायत जगदीशपुर में स्वयं की राशि से शौचालय बनाने वाले हितग्राही अपनी ही राशि पाने के लिए वर्षों से भटक रहे हैं. करीब 200 हितग्राहीयो को राशि नहीं मिलने से परेशान हैं. इसके लिए वे अधिकारियों के चक्कर काटते-काटते थक हार चुके है. शिकायत पर कई बार जांच किया गया लेकिन जांच के बाद जो कार्रवाही की गई ग्रामीण आज पर्यन्त संतुष्ट नहीं है.

इस दौरान बीते 5 सालो में जगदीशपुर ग्राम पंचायत में 3 लोगो ने सरपंच पद का कार्यभार संभाला है. सचिव भी 4 बदल चुके है लेकिन अब भी ना किसी को शौचालय की राशि किसी को मिली हैं और न नही कोई सरपंच सचिव इस विषय मे ग्रामीण जनता से विचार विमर्श कर रहे है.

ग्रामीणों का कहना है कि इस योजना मे हमने भी सेठ साहूकार से कर्जा लेकर शासन के निर्देश से शौचालय बनाया था. लेकिन हितग्राहियों को प्रोत्शाहन राशि शासन के द्वारा निर्धारित किया था अब तक हमें नही मिल पाया है.

ग्रामीणों ने बताया कि इसकी शिकायत वे जनपद पंचायत से लेकर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री से की थीं कई बार अधिकारी जांच के नाम से आते है जांच करते हैं लेकिन जांच पर कार्यवाही नही करते जिससे देख कर ये लगता हैं कि जो भी अधिकारी जगदीशपुर ग्राम पंचायत में निरीक्षण के लिए आये वो भष्ट्राचार में लिप्त हो गए हैं. ग्रामीणों का अब तो अधिकारियों के ऊपर से विश्वास ही उठ चूका है. अब तो भी सरकार बदल गई मगर न्याय नहीं मिल पाया.

इस न्याय की प्रक्रिया में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहाँ के सरपंच असीम सोना कार्रवाही के दौरान 2 बार निलंबित हो चुके है. लेकिन वर्त्तमान में फिर से सरपंच के पद पर आसीन है. 2016 से लेकर अब तक कई मामलो में इन पर ग़बन करने के आरोप लगें है.

सितंबर 2016 में पेंशन से करीब 200 हितग्राही वंचित रहने की वजह से जिला पंचायत सदस्य त्रिलोचन नायक, कमरूद्दीन शाह एवं मुंशी प्रधान के नेतृत्व में पीडि़त अनशन पर बैठ गए थे. बताया जा रहा था कि सरपंच ग्राम के लगभग 250 वृद्धा पेशनधारियों को मार्च 2016 से पेंशन राशि नहीं दे रहा था. जिसके चलते एक हितग्राही के पास खाने के लिए न तो अनाज था और न ही शासकीय चावल खरीदने पैसा था. इस तंगहाली से एक व्यक्ति के मौत की ख़बर भी सामने आई थी. जिसके बाद सरपंच असीम सोना फ़रार हो गए थे.  

इसके बाद अक्टूबर 2016 में जगदीशपुर के सरपंच असीम सोना को वित्तीय अनियमितता बरतने पर अनुविभागीय राजस्व अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. बताया जा रहा था कि सरपंच सोना ने ग्राम पंचायत की बैठक दिनांक 15 और 22 अप्रैल 2016 के अनुसार सरपंच व सचिव ने फर्जी प्रस्ताव बनाकर ग्राम पंचायत के बैंक खाते से 6 लाख दो हजार 850 रुपए बिना पंचों के हस्ताक्षर से निकाल लिए थे.

बर्ख़ास्त होने के बाद असीम सोना किसी तरह फिर से जगदीशपुर सरपंच पद पर आसन्न हो गए. मगर भ्रष्टाचार का खेल चलता रहा. दिसंबर 2017 सरपंच असीम सोना पर शौचालय में ग़बन और आवास के लिए अवैध रूप से राशि लेने का आरोप लगा. बताया जा रहा था कि स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत लगभग 18 लाख 90 हजार ग्राम पंचायत के मांग के बाद खाते में भेजा गया था जिसे सरपंच द्वारा निकाल लिया गया लेकिन अभी तक हितग्राहियो को वितरण नहीं किया गया है.

जबकि पूर्व में भी सरपंच द्वारा पेंशन की राशि को गबन करने का मामला सामने आया था. जिसे ताक में रखते हुए सरपंच को शौचालय की राशि आहरण कर फायदा उठाने दिया गया. राशि आहरण किये जाने के बाद फिर एक बार सरपंच असमी सोना के ख़िलाफ जांच की गई और कार्रवाही कर उसे दोबारा बर्ख़ास्त 19 सितंबर 2018 को किया गया. इस कार्रवाही के दौरान भी सरपंच असीम सोना फ़रार रहे थे.

इसी दौरान जुलाई 2018 में सरपंच असीम सोना का एक और मामला सामने आया था जिसमे वो गिरफ्तार कर लिए गए थे. बताया जा रहा था कि नौकरी लगाने के नाम पर इसने कई लोगों से लाखों रुपए की ठगी की है. पुलिस के मुताबिक ग्राम जगदीशपुर के सरपंच असीम सोना नौकरी लगाने के नाम पर क्षेत्र के कई लोगों से करीब 24 लाख 67 हजार रुपए लिए थे. पैसे लेने के बाद सरपंच आज-कल कहकर लोगों को घुमाते रहा.

मगर भाग्य और न्याय देखों वर्त्तमान में भी असीम सोना जगदीशपुर के सरपंच पद पर विराजमान है. जबकि ग्रामीण आज भी अपने शौचालय की राशि हेतु न्याय के लिए दर-दर भटक रहे है.