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सरायपाली के पूर्व बीएमओ डॉ अमृत रोहेल्डर के खिलाफ हुई एफआईआर पर हाईकोर्ट ने लगाया स्टे

सरायपाली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बीएमओ पद पर पदस्थ रहे डॉ अमृत रोहेल्डर के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर कीडा के लीगल एडवाइजर द्वारा लगाए गए कोर्ट केस पर माननीय हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया है।

एक लोकल जनप्रतिनिधि के शिकायत पर सरायपाली एसडीएम के जांच व अनुशंसा पर पहले सरायपाली बीएमओ को सस्पेंड किया गया था । फिर माननीय हाई कोर्ट ने इस निलंबन के खिलाफ स्टे दिया था। जिसके तुरंत बाद बीएमओ के खिलाफ एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार द्वारा सरायपाली थाने में एफआईआर दर्ज कराया गया था । जिसके खिलाफ हाई कोर्ट में केस लगाया गया था । इसे माननीय हाई कोर्ट ने बड़ी गम्भीरतपुर्वक संज्ञान में लिया है और इसे डॉक्टर के खिलाफ एक हरासमेंट की तरह माना है ।

जिसमें सुनवाई के दौरान -बीएमओ के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर स्टे लगाया गया है। तथा एसडीएम को नोटिस जारी कर एफिडेविट देने का सख्त निर्देश दिया गया है कि वे अपने प्रशासनिक शक्ति के बारे में विवरण दें ।नायब तहसीलदार को भी नोटिस जारी कर तथा उनके द्वारा बीएमओ के खिलाफ की गई प्रक्रियाओं और अधिकारों की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है । महासमुन्द के पुलिस अधीक्षक को भी नोटिस जारी कर और एफिडेविट देने कहा गया है कि एफआईआर की कॉपी डॉ अमृत को क्यों नही दी गई । वही राज्य के पुलिस प्रमुख पुलिस महानिर्देशक को भी नोटिस जारी कर एफिडेविट देने का निर्देश दिया है कि राज्य भर मे माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन क्यों नही किया जा रहा है और पालन के लिए क्या क्या दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं ।लोकल जनप्रिनिधि शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी कर एफिडेविट देने का निर्देश दिया गया है ।

उक्त जानकारी डॉ इकबाल हुसैन अध्यक्ष – छत्तीसगढ़ इन सर्विस डाक्टर्स एसो. (CIDA ) ने व्हाट्सएप के माध्यम से देते हुवे बताया कि संघ द्वारा टी एस सिंहदेव ( स्वास्थ्य मंत्री -छत्तीसगढ़ शासन ) को विगत 8/11/19 को पत्र लिखकर डा अमृत रोहेल्डर के खिलाफ की गई कार्यवाही को गलत बताते हुवे राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई कार्यवाही की निंदा की गई है ।

ज्ञातव्य हो कि सरायपाली के आई टी सेल के जिलाध्यक्ष जफर उल्ला द्वारा बीएमओ डॉ अमृत रोहेल्डर द्वारा अपने निवास में सोनोग्राफी का संचालन अवैध रूप से करने व गर्भवती महिलाओं का परीक्षण तथा प्रसव कराये जाने की शिकायत प्रदेश के मुख्यसचिव व अन्यो को की गई थी । इसकी जांच सरायपाली के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व विनय कुमार लंगेह द्वारा की गई थी । जांच में शिकायत सही पाए जाने के कारण अवर सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा उन्हें निलंबित किया गया था । तथा बाद में एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार द्वारा अक्टूबर 2019 में सरायपाली थाने में डॉ अमृत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई । पुलिस द्वारा धारा 23 के PCPNDT 1994 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था ।



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