लोकतंत्र में नहीं है हिंसा की जगहः रविशंकर प्रसाद
संशोधित नागरिकता क़ानून प्रताड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देता है। इसे एक बार फिर क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने स्पष्ट किया। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को लेकप विपक्ष पर हमला कर कहा कि यूपीए सरकार के समय समर्थन किया तो अब विरोध क्यों किया जा रहा है। वहीं उ.प्र. सरकार भी राज्य में हुए हिंसक प्रदर्शनों शामिल पीएफआई को प्रतिबंधित करने के लिए कार्रवाई कर रही है।
संशोधित नागरिकता क़ानून को लेकर केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक बार फिर स्पष्ट किया कि ये क़ानून उन लोगों को नागरिकता देता है जो प्रताड़ित हैं और भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को लेकर कहा कि इसके आंकड़ो को विकासशील योजनाओं के क्रियान्वयन में इस्तेमाल किया जाएगा। क़ानून मंत्री ने विरोध करने वालों से सवालिया लहजे में पूछा भी कि जब यूपीए सरकार के समय इसका समर्थन किया था अब बेवजह विरोध क्यों? देश के कुछ क्षेत्रों में साजिशन हुए हिंसक प्रदर्शन पर खेद भी जताया और कहा कि लोकतंत्र में अपनी असहमति ज़ाहिर करने का हक़ सभी को है लेकिन हिंसा का नहीं।
दूसरी ओर संशोधित नागरिकता क़ानून को लेकर केरल विधानसभा में एक प्रस्ताव पास किया गया जिसमें सीएए को वापिस लेने की मांग की गई। राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को जहां कांग्रेस ने समर्थन किया तो वहीँ भाजपा विधायक ओ. राजगोपाल ने पुरज़ोर विरोध करते हुए कहा कि ये प्रस्ताव संकीर्ण राजनैतिक मानसिकता दिखा रहा है। वहीं क़ानून मंत्री ने भी कहा कि नागरिकता को लेकर क़ानून संबंधी अधिकार सिर्फ संसद के पास हैं। विधानसभाओं के पास नहीं।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार भी हिंसक प्रदर्शन और राज्य में सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान मामले में एक और कदम बढाने जा रही है। दरअसल 19 दिसम्बर को लखनऊ सहित राज्य के कई शहरो में उग्र परदर्शन हुए थे। जिनमें पीएफआई के द्वारा रची गई एक साजिश का खुलासा हुआ है। सबूतों के आधार पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने राज्य के गृह मंत्रालय को एक चिठ्ठी लिख संस्था को प्रतिबंधित करने की मांग की गई है। जिस पर राज्य सरकार ने भी उचित कार्यवाई करने का भरोसा दिया है।
वहीं दिल्ली की एक कोर्ट ने सीमापुरी में हिंसा और उपद्रव करने वाले 11 आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले पर छह जनवरी को सुनवाई करेगी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी है। इसके अलावा सीलमपुर इलाके में 17 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के बीच हिंसा में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों यूसुफ अली और मोइनुद्दीन को मेडिकल ग्राउंड पर 3 हप्ते के लिए जमानत दे दी है। मामले में अगली सुनवाई भी 21 जनवरी को होगी।