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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, प्रवासी मजदूर को 15 दिनों में भेजें घर, दिया जाए रोजगार

सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों को लेकर मंगलवार को अहम फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि प्रवासी मजदूरों को 15 दिनों के भीतर वापस उनके घरों को भेजा जाए। साथ ही कोर्ट ने केंद्र से श्रमिकों के लिए अतिरिक्त ट्रेनें चलाने के लिए भी कहा। कोर्ट ने कहा केंद्र और राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों की सूची बनाएं और उनके कौशल के अनुसार रोजगार उपलब्ध करवाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वायरस की वजह से देश भर में लगे लॉक डाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों को लेकर बड़ा फैसला दिया है। उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया कि प्रवासी मजदूरों को 15 दिन के अंदर उनके गृह राज्य वापस भेजा जाए। इसके अलावा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत प्रवासियों के खिलाफ दर्ज लॉक डाउन के आदेशों का उल्लंघन करने वाले सभी मामले वापस लिए जाएं। कोर्ट ने कहा प्रवासी मजदूरों के लिए 24 घंटे के अंदर केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त ट्रेनें दी जाएंगी।'

सुप्रीम कोर्ट ने अन्य राज्यों से इस संबंध में हलफनामा मांगा है। अदालत ने कहा, 'केंद्र और राज्यों को सुव्यवस्थित तरीके से प्रवासी श्रमिकों की पहचान के लिए एक सूची तैयार करनी होगी। प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार राहत को मैप और कौशल मानचित्रण किया जाएगा। अदालत ने आगे कहा कि श्रमिक ट्रेनों की मांग की स्थिति में रेलवे 24 घंटे के भीतर ट्रेनें उपलब्ध कराएगा। साथ ही रेलवे प्रवासी श्रमिकों को सभी योजनाएं प्रदान करेगा और उन्हें प्रचारित करेगा। शीर्ष अदालत ने कहा सभी राज्यों से योजनाओं, रोजगार सृजन आदि को लेकर अपना विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने के लिए कहा है। अब मामले की अगली सुनवाई आठ जुलाई को होगी।

इससे पहले हुई सुनवाई में क्या हुआ था :

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस मामले का संज्ञान लेकर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकारें बताएं कि वो प्रवासी मजदूरों के लिए क्या कर रही हैं। प्रवासी मजदूरों के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार 5 जून को सुनवाई हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान केंद्र और राज्य सरकारों से कहा था कि प्रवासी मजदूरों को अगले 15 दिनों में अपने-अपने घर पहुंचा दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला 9 जून तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।

लॉक डाउन के दौरान देशभर में फंस गए थे प्रवासी मजदूर :

बता दें कि मार्च महीने के अंतिम दिनों में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने देश भर में लॉक डाउन लागू किया था, जिसे बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया गया। हालांकि, एक जून के बाद से अनलॉक-1 को भी लागू किया गया है। लॉक डाउन के दौरान रोजगार न मिलने की वजह से लाखों की संख्या में मजदूर जहां-तहां फंस गए थे। इसके बाद कई मजदूर पैदल ही अपने घर के लिए चल पड़े थे। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार ने एक मई से प्रवासी मजदूरों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया था। रेलवे ने दावा किया था कि इन ट्रेनों के जरिए से अभी तक लाखों मजदूरों को उनके घर पहुंचाया जा चुका है।


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