सौर ऊर्जा से किसान सुमलु के खेतों में आई हरियाली : सिंचाई के लिए बरसात पर निर्भरता हुई कम
आदिवासी अंचलों में भी अब आधुनिक तकनीक का
उपयोग खेती-किसानी में किया जाने लगा है। सूरज की असीम ऊर्जा का उपयोग कर
किसान अब खेतों में सिंचाई सुविधा बढ़ा रहे हैं जिससे उनकी बरसात पर
निर्भरता कम हुई हैं। इसमें राज्य शासन द्वारा संचालित सौर सुुजला योजना
ग्रामीणों की मदद कर रही है। बस्तर जिले के बकावण्ड विकासखण्ड के बजावण्ड
गांव के किसान श्री समलु बेसरा ने भी अपने तीन एकड़ खेत में क्रेडा के सहयोग
03 एच.पी. का सोलर पंप लगाकर बरसात न होने पर होने वाले आर्थिक नुकसान से
बचाव कर लिया है।
खेतों में 03 एच.पी. का सोलर पंप लगाने में 02 लाख रूपए का खर्च आता है। लेकिन श्री समलु को क्रेड़ा के द्वारा अनुदान देकर मात्र 10 हजार रूपए में पंप प्रदान किया गया है। पंप स्थापना उपरांत उनके द्वारा 03 एकड़ खेत में मक्का की खेती की गई थी जिससे 12 टन मक्का का उत्पादन हुआ। मक्के की फसल को 1120 रूपए प्रति क्विंटल के दर से बिक्री कर श्री समलु ने 1 लाख 34 हजार 400 रूपए का आर्थिक लाभ प्राप्त किया है।
सौर सुजला योजना से जिले में विगत 4 वर्ष 2016-17, 2017-18, 2018-19
और 2019-2020 में 250 हितग्राहियों के खेतों में सोलर पंप स्थापित कर
लाभान्वित किया गया है। वर्ष 2019-20 में 1070 पंपों का स्थापना कार्य
प्रगति पर है। उल्लेखनीय है कि सोलर पंप से फसल सिंचाई हेतु सुविधा मिलने
के कारण कृषकों को खेती करने में बहुत सुविधा हो रही है। सोलर पंप स्थापना
के पूर्व फसल बोने के बाद खेतों में सिंचाई हेतु किसान पूरी तरह से बरसात
पर ही निर्भर थे। बरसात अच्छी होने पर फसल अच्छी होती है तथा बरसात न होने
या कम होने पर किसानों की फसल खराब हो जाती थी जिससे किसानों को आर्थिक
नुकसान होता था। सोलर पंप स्थापना के बाद किसान पानी की पर्याप्त सुविधा
होने से खेती से भरपूर लाभ ले रहे हैं।