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केंद्र सरकार ने सिविल सेवा क्षमता विकास के लिए 'मिशन कर्मयोगी' की शुरुआत को दी हरी झंडी

सिविल सेवा की कार्यपद्धति और सिविल सेवकों की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ऐतिहासिक सुधार का ऐलान किया। मंत्रिमंडल ने मिशन कर्मयोगी शुरु करने का फैसला लिया है जिसके तहत राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम यानी एनपीसी-एससीबी चलाया जाएगा / इसके अलावा कैबिनेट की बैठक में संसद में जम्मू-कश्मीर के लिए राजभाषा विधेयक लाने को मंजूरी दी गई जिसमें उर्दू, कश्मीरी, डोगरी, हिन्दी और अंग्रेजी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषा बनाने का प्रावधान है।

बुधवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में एक ऐसे अहम सुधार का एलान किया गया जो आने वाले समय सरकारी कमर्चारियों की कार्यक्षमता में अभूतपूर्व सुधार का रास्ता साफ करेगी । सरकार ने  सिविल सेवा क्षमता विकास के लिए नई राष्ट्रीय व्यवस्था लाने का फैसला किया । इसके लिए मिशन कर्मयोगी शुरु किया जा रहा है जिसके तहत राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम यानी एनपीसीएससीबी चलाया जाएगा । कार्यक्रम का उद्देश्य  सिविल सेवा क्षमता विकास के लिए नई राष्ट्रीय अवसंरचना तैयार करना और  दक्षतापूर्ण सार्वजनिक सेवा प्रदान करने के लिए व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रिया स्तरों पर क्षमता विकास व्यवस्था में व्यापक सुधार करना है ।

सिविल सेवा क्षमता विकास योजनाओं  की मंजूरी प्रदान करने और उसकी निगरानी करने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मानव संसाधन परिषद का गठन होगा । प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होंगे जबकि केंद्रीय मंत्री. राज्यों के मुख्यमंत्री और तमाम शिक्षाविद और कारोबारी जगत की हस्तियां इसमें शामिल होंगी ।  साथ ही क्षमता विकास आयोग बनेगा  । इसका काम क्षमता विकास गतिविधियों का मानकीकरण, सामंजस्य और साझा समझ विकसित करना है । ऑनलाइन  प्लेटफार्म के स्वामित्व  और संचालन के लिए पूर्ण सरकारी स्वामित्व वाला विशेष प्रयोजन व्‍हीकल यानी एसपीवी बनाया जाएगा ।

कैबिनेट की बैठक में संसद में जम्मू-कश्मीर के लिए राजभाषा विधेयक लाने को मंजूरी दी गई जिसमें उर्दू, कश्मीरी, डोगरी, हिन्दी और अंग्रेजी आधिकारिक भाषा होंगी।

इसके अलावा कैबिनेट ने  तीन एमओयू को भी मंजूरी दी है ।  इसमें जापान के साथ वस्त्र मंत्रालय का , फिनलैंड से खनन मंत्रालय का और  डेनमार्क से रिन्यूअल एनर्जी मंत्रालय का एमओयू शामिल है ।

राष्ट्रीय भर्ती परीक्षा के फैसले के बाद सरकार का ये बड़ा सुधार है । मिशन कर्मयोगी का लक्ष्य भारतीय सिविल सेवक को और अधिक रचनात्मक, सृजनात्मक, विचारशील, नवाचारी, अधिक क्रियाशील, पेशेवर, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी समर्थ बनाते हुए भविष्य के लिए तैयार करना है। इसके लागू होने के बाद विशिष्ट भूमिका क्षमताओं के साथ सिविल सेवक उच्च गुणवत्ता वाली मानक प्रभावी सेवा उपलब्ध करने में समर्थ हो सकेंगे।

पीएम मोदी ने मिशन कर्मयोगी के फैसले को बेहद अहम बताते हुए ट्विटर पर लिखा- आज की कैबिनेट बैठक में सिविल सेवा क्षमता विकास के लिए जिस राष्ट्रीय कार्यक्रम की मंजूरी मिली है उससे सरकार में मानव संसाधन प्रबंधन में अहम सुधार होगा । यह सिविल सेवकों की क्षमता बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक ढांचे का इस्तेमाल करेगा ।


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