भारत-चीन मतभेद व तनाव कम करने के लिए उठाएंगे विश्वास बहाली के कदम
लद्दाख में सीमा विवाद के बीच पिछली रात भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच मॉस्को में मुलाकात हुई. मौका था शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों का सम्मेलन. डॉक्टर एस जयशंकर और वांग यी के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक हुई. इस दौरान हुई बातचीत में दोनों देशों के बीच नियंत्रण रेखा पर तनाव दूर करने पर सहमत बनी है और सामने आई पांच सूत्रीय ख़ाका. क्या हैं ये पांच सूत्र देखिए इस रिपोर्ट में.
भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हुई थीं. एससीओ की बैठक के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई. ढाई घंटे की बातचीत के बाद गुरुवार देर रात दोनों देशों की ओर जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में चार महीने से जारी गतिरोध को दूर करने के लिए बलों को सीमा से पीछे हटाने और तनाव बढ़ा सकने वाली किसी भी कार्रवाई से बचने समेत पांच सूत्री खाके पर सहमति जताई.
संयुक्त बयान के मुताबिक़ एस जयशंकर और वांग यी ने सहमति जताई कि दोनों पक्षों को भारत-चीन संबंधों को विकसित करने के लिए दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी आम सहमति से मार्गदर्शन लेना चाहिए, जिसमें मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना शामिल है. दोनों विदेश मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि मौजूदा स्थिति किसी के हित में नहीं है. साथ ही सीमा पर तैनात दोनों देशों के जवानों के बीच बातचीत जारी रखने, तुरंत पीछे हटने उचित दूरी बनाए रखने और तनाव कम करने को लेकर सहमति बनी. साथ ही दोनों पक्ष चीन-भारत सीमा मामलों संबंधी सभी मौजूदा समझौतों और नियमों का पालन करेंगे, सीमावर्ती इलाकों में शांति बनाए रखेंगे और किसी भी ऐसी कार्रवाई से बचेंगे, जो तनाव बढ़ा सकती है.
विदेश मंत्रियों की बैठक में सबसे ज्यादा जोर हर स्तर पर संवाद को कायम रखने और दोनों देशों के रिश्तों में विश्वास बहाली पर था. संयुक्त बयान के मुताबिक दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा मामले पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र के माध्यम से संवाद और संचार जारी रखने के लिए सहमति व्यक्त की. दोनों ने इस बारे में भी सहमति जताई कि भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के कार्य तंत्र यानि WMCC की बैठकें भी जारी रहनी चाहिए.
सूत्रों के मुताबिक बैठक में भारत ने जोर देकर कहा कि पूर्वी लद्दाख में हाल में ही हुई घटनाओं से द्विपक्षीय रिश्तों के विकास पर असर पड़ा है और इसका तत्काल समाधान दोनों देशों के हित में है. सूत्रों के मुताबिक वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष ने एलएसी के पास चीन द्वारा बड़ी संख्या में बलों और सैन्य साजो सामान की तैनाती पर चिंता जताई. भारतीय पक्ष ने चीन के प्रतिनिधिमंडल से कहा कि बड़ी संख्या में सैनिकों का इस प्रकार का जमावड़ा सीमा विवाद पर 1993 और 1996 के द्विपक्षीय समझौतों के अनुरूप नहीं है. भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि एलएसी पर चीनी सैनिकों का उकसाने वाला व्यवहार द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का अनादर है. भारतीय पक्ष ने स्पष्ट रूप से बता दिया कि वह सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रबंधन पर सभी समझौतों का पालन किए जाने की उम्मीद करता है और एकतरफा ढंग से यथास्थिति बदलने के किसी प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा. इसमें यह भी जोर दिया गया कि भारतीय सैनिक सीमा क्षेत्रों के प्रबंधन से संबंधित सभी समझौतों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करते हैं.
लद्दाख के सांसद के साथ ही विशेषज्ञों ने भी चीन पर सरकार के कड़े रुख का समर्थन किया है और उम्मीद जाहिर की है कि पांच सूत्रीय सहमति से सीमा पर तनाव घटेगा.
दोनों देशों के बीच एक सप्ताह में दूसरी बार उच्च स्तरीय संपर्क हुआ है. इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके चीनी समकक्ष जनरल वेई फेंगहे ने एससीओ बैठक से इतर मॉस्को में मुलाकात की थी. भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच मई की शुरुआत से पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास कई स्थानों पर तनाव बना हुआ है लगातार बातचीत का दौर जारी है. इन सब बातचीत के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली में एलएसी की स्थिति की समीक्षा के लिए अहम बैठक की जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुख शामिल थे.
कुल मिलाकर एक बार फिर से भारत ने चीन को साफ संदेश दे दिया है कि उसे सभी क्षेत्रों से अपने सैनिक वापस हटाने होंगे. भारत ने ये भी बता दिया है कि संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं सौहार्द बनाए रखना जरूरी है.