दक्षिण पोर्टल पर दुनिया की सबसे लम्बीक राजमार्ग टनल– अटल टनल... - CG Sandesh

दक्षिण पोर्टल पर दुनिया की सबसे लम्बीक राजमार्ग टनल– अटल टनल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रल को किया समर्पित.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज मनाली में दक्षिण पोर्टल पर दुनिया की सबसे लम्बीो राजमार्ग टनल– अटल टनल राष्ट्रि को समर्पित किया. यह टनल 9.02 किलोमीटर लंबी है, जो पूरे साल मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ती है. इससे पहले, यह घाटी भारी बर्फबारी के कारण लगभग 6 महीने तक अलग-थलग रहती थी. यह टनल हिमालय की पीरपंजाल पर्वतमाला में औसत समुद्र तल (एमएसएल) से 3000 मीटर (10,000 फीट) की ऊंचाई पर अति-आधुनिक सुविधाओं के साथ बनाई गई है.

यह टनल मनाली और लेह के बीच सड़क की दूरी 46 किलोमीटर कम करती है और दोनों स्थाानों के बीच लगने वाले समय में भी लगभग 4 से 5 घंटे की बचत करती है. यह टनल सेमी ट्रांसवर्स वेंटिलेशन सिस्टम, एससीएडीए नियंत्रित अग्निशमन, रोशनी और निगरानी प्रणालियों सहित अति-आधुनिक इलेक्ट्रो -मैकेनिकल प्रणालियों से युक्तं है. इस टनल में पर्याप्तर सुरक्षा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस टनल में दक्षिण पोर्टल से उत्तयरी पोर्टल तक यात्रा की और मुख्यप टनल में ही बनाई गई आपातकालीन टनल का भी निरीक्षण किया. उन्हों ने इस अवसर पर ‘द मेकिंग ऑफ अटल टनल’ पर एक चित्रात्मुक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की सीमा संपर्क परियोजनाएं सुरक्षाबलों की भी मदद करेंगी, क्योंलकि इससे सुरक्षाबलों के लिए नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी और उन्हेंर गश्तस करने में भी मदद मिलेगी. प्रधानमंत्री ने इस सपने को साकार करने में अपने जीवन को जोखिम में डालने वाले इंजीनियरों, तकनीशियनों और श्रमिकों के साहस और प्रयासों की सराहना की.

उन्होंने कहा कि अटल टनल भारत के सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को नई मजबूती देने जा रही है. यह विश्वास्तंरीय संपर्क का जीता-जागता सबूत होगी. उन्होंटने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और समग्र विकास में सुधार करने की लम्बेर समय से चली आ रही मांग के बावजूद कई योजनाएं दशकों तक केवल बिना किसी प्रगति के लटकाने के लिए ही बनाई गईं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि अटल जी ने वर्ष 2002 में इस टनल की पहुंच सड़क की आधारशिला रखी थी. अटल जी सरकार के बाद इस काम की इतनी उपेक्षा की गई कि 2013-14 तक केवल 1300 मीटर यानी डेढ़ किलोमीटर से भी कम टनल का निर्माण हुआ अर्थात एक साल में केवल लगभग तीन सौ मीटर टनल का ही निर्माण हुआ. तब विशेषज्ञों ने कहा था कि अगर निर्माण इसी गति से जारी रहा, तो यह टनल 2040 तक ही पूरी हो सकेगी.

मोदी ने कहा कि इसके बाद सरकार ने इस परियोजना पर तेजी से काम शुरू किया और हर साल 1400 मीटर की गति से निर्माण कार्य हुआ। उन्हों ने कहा कि इससे यह परियोजना 6 वर्षों में पूरी हो कई है, जबकि इसका अनुमान 26 साल में पूरी होने का था.

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रगति करने की जरूरत हो, तो बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित किया जाना चाहिए. इसके लिए राजनीतिक इच्छाग शक्ति और प्रतिबद्धता की जरूरत है. उन्हों ने कहा कि ऐसी महत्वकपूर्ण और मुख्यब बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के पूरा होने में हुई देरी से वित्ती य हानि होने के साथ-साथ लोगों को आर्थिक और सामाजिक लाभ से वंचित होना पड़ता है.


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