जीएसटी काउंसिल की 42वीं बैठक आज नियमों में बदलाव के संकेत - CG Sandesh

जीएसटी काउंसिल की 42वीं बैठक आज नियमों में बदलाव के संकेत

सरकार जीएसटी रिटर्न से जुड़े कई नियमों में बदलाव करने जा रही है। यह बदलाव जीएसटी संबंधी टैक्स चोरी पर रोक के साथ कारोबारियों को और सहूलियत देने के लिए किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक जीएसटी काउंसिल की प्रस्तावित 42वीं बैठक में रिटर्न संबंधी नियमों में बदलाव पर फैसला हो सकता है। बैठक में आयुर्वेदिक सैनिटाइजर पर जीएसटी दरों में बदलाव पर भी फैसला संभव है। रिटर्न संबंधी बदलाव प्रस्तावित नियमों के मुताबिक कारोबारियों को जीएसटीआर-3बी रिटर्न फाइल करने से पहले जीएसटीआर-1 फाइल करना अनिवार्य होगा।

अभी जीएसटीआर-3बी रिटर्न फाइल करने के बाद भी कारोबारी जीएसटीआर-1 रिटर्न फाइल कर सकते हैं। जीएसटी विशेषज्ञ एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) प्रवीण शर्मा के मुताबिक जीएसटीआर-1 में कारोबारियों को यह दिखाना होता है कि उनकी बिक्री कितनी हुई है। वहीं जीएसटीआर-3बी में कारोबारी परचेजिंग टैक्स व बिक्री पर बनने वाला टैक्स को दिखाते हैं। नए नियम से सरकार को यह पता चल जाएगा कि जो बिक्री हुई है उसके हिसाब से टैक्स दर्शाया गया है या नहीं।

अभी जीएसटीआर-3बी पहले भरने की सुविधा होने की वजह से टैक्स चोरी की नीयत रखने वाले कारोबारी बिक्री के मुकाबले कम टैक्स दिखाते हैं।

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक पैन और आधार कार्ड से जुड़े जिस खाते का जीएसटी नंबर लेने में इस्तेमाल किया गया है, अब उसी खाते में जीएसटी रिफंड आएगा। अभी किसी भी खाते में कारोबारी जीएसटी रिफंड ले सकता है। सरकार जीएसटी भुगतान प्रणाली को भी और सरल बनाने जा रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत कारोबारी जीएसटी का भुगतान इमीडिएट पेमेंट सर्विंस (आइएमपीएस) और यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) के माध्यम से भी कर सकेंगे। अभी जीएसटी भुगतान करने के लिए कारोबारी इंटरनेट बैंकिंग, चालान या चेक का सहारा लेते हैं। 

बैठक में आयुर्वेदिक, यूनानी और सिद्ध (एयूएस) तत्वों से बनने वाले सैनिटाइजर पर जीएसटी दरें घटाकर 12 प्रतिशत की जा सकती हैं, जो अभी 18 प्रतिशत है। हरियाणा आयुर्वेदिक ड्रग मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन इस मामले को लेकर अदालत भी जा चुका है।

कांग्रेस शासित राज्यों को कर्ज लेना मंजूर नहीं

जीएसटी काउंसिल की 42वीं बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा राज्यों की क्षतिपूर्तिं का है। कांग्रेस शासित राज्यों का कहना है कि उन्हें क्षतिपूर्तिं के लिए कर्ज लेना किसी भी हाल में मंजूर नहीं है। छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर मंत्री टीएस सिंह देव ने बताया कि वे क्षतिपूर्तिं के लिए जून, 2022 का इंतजार कर लेंगे।

राजस्व की कमी को देखते हुए राज्य के खर्च में कटौती की जाएगी, लेकिन किसी भी विकल्प के तहत कर्ज नहीं लेंगे।

उनका कहना है कि जब केंद्र कर्ज दिलाने के लिए राजी है, कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सेस का कलेक्शन भी केंद्र सरकार करती है, तो कर्ज भी उसे ही लेना चाहिए। क्षतिपूर्तिं के लिए जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक में राज्यों को कर्ज लेने के दो विकल्प दिए गए थे। केंद्र सरकार का कहना है कि कोई भी विकल्प नहीं चुनने वाले राज्य को क्षतिपूर्तिं के लिए जून, 2022 तक इंतजार करना पड़ेगा।

कांग्रेस शासित राज्यों समेत पश्चिम बंगाल व दिल्ली कर्ज लेने के पक्ष में नहीं हैं। शेष अधिकतर राज्य कर्ज लेने के लिए राजी हो गए हैं।


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