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सर्दियों में भारत में ज्यादा खतरनाक हो जाएगा Coronavirus: डॉ. हर्षवर्धन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने अपने साप्ताहिक सोशल मीडिया इंटरेक्शन प्रोग्राम संडे संवाद को संबोधित करते हुए कहा,"SARS Cov 2 एक श्वसन वायरस है और ठंड के मौसम में श्वसन वायरस के संचरण (ट्रांसमिशन) को बढ़ने के लिए जाना जाता है। श्वसन वायरस ठंड के मौसम और कम आद्रता की स्थिति में बेहतर पनपते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "एक और तथ्य है जिसे ध्यान में रखना आवश्यक है। सर्दियों के दौरान आवासों में भीड़भाड़ बढ़ जाती है, जो संचरण को बढ़ा सकती है। इसलिए भारतीय संदर्भ में यह मानना गलत नहीं होगा कि सर्दियों के मौसम में मामलों की संख्या में वृद्धि देखी जा सकती है।"

कई रिपोर्टों में यह संकेत मिलता है कि सर्दियों के दौरान कोरोना वायरस ( Coronavirus in winters ) के मामलों की संख्या बढ़ेगी। लेकिन क्या यह बात सही है, के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रविवार को पुष्टि की कि भारत के संदर्भ में इसकी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है। 

स्वास्थ्य मंत्री ने यूरोपीय देशों, विशेषकर यूनाइटेड किंगडम के उदाहरणों का भी हवाला दिया, जहां सर्दियों के आगमन के साथ संक्रमण की संख्या बढ़ गई है। उन्होंने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा, "इसलिए, हम एहतियाती उपायों पर जोर दे रहे हैं जिनका पालन करना आसान है। डरने और कांपने की जरूरत नहीं है। मास्क पहनें और सामाजिक दूरी बनाए रखें। रोकथाम इलाज से बेहतर है।" 

यूनाइटेड किंगडम के चिकित्सा विज्ञान अकादमी द्वारा की गई मॉडलिंग के अनुसार, सर्दी बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसने जनवरी/फरवरी 2021 में अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु होने की संख्या बढ़ने की भविष्यवाणी की है। वहीं, रोग नियंत्रण के राष्ट्रीय केंद्र (एनसीडीसी) हाल ही में चेतावनी दी है सर्दियों में दिल्ली में रोजाना लगभग 15,000 कोरोना मामले सामने आने की संभावना है।

दिल्ली के लिए कोविड-19 की संशोधित रणनीति संबंधी दस्तावेज में एनसीडीसी ने कहा, "सर्दी के महीने सांस की बीमारियों को गंभीर बनाते हैं। बड़ी संख्या में दिल्ली के बाहर से मरीज आ सकते हैं। दूर के इलाकों से आने वाले मरीजों के अधिक गंभीर होने की संभावना है। इसके अलावा त्योहार-संबंधी समारोहों के साथ मामलों में अचानक वृद्धि हो सकती है। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि दिल्ली को लगभग रोजाना करीब 15,000 पॉजिटिव केस में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना चाहिए और मध्यम व गंभीर बीमारी वाले मरीजों के के प्रवेश की व्यवस्था करना चाहिए, जो मोटे तौर पर इस बढ़ोतरी का 20 फीसदी हैं।"



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