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वायु प्रदूषण और कोरोना के चलते पश्चिम बंगाल में काली पूजा और दिवाली पर पटाखों पर रोक

देश में जारी कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रकोप के बीच पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Government) ने काली पूजा (Kali Puja) और दिवाली (Diwali) के मौके पर पटाखों (Crakers) पर रोक लगाने का फैसला किया है. राज्य के मुख्य सचिव ने मंगलवार को ये जानकारी दी. पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुख्य सचिव अल्पन बंदोपाध्याय ने मंगलवार को कहा कि

वायु प्रदूषण (Air Pollution) रोकने और कोविड-19 के मरीजों की हालत को खराब होने से बचाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार काली पूजा, दिवाली उत्सव के दौरान पटाखे चलाने की अनुमति नहीं देगी.

बता दें बंगाल में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 3 लाख 85 हजार से भी ज्यादा हो चुकी है. पश्चिम बंगाल में कोविड-19 से मंगलवार को 56 और मरीजों की मौत हुई है, जिससे राज्य में मृतकों की संख्या बढ़कर 7,013 पर पहुंच गई. वहीं राज्य में 4,058 मरीज ठीक हुए, जिससे राज्य में ठीक हो चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 3,42,133 हो गई.

स्वास्थ्य विभाग ने एक बुलेटिन में यह जानकारी दी. इसके मुताबिक, इसी अवधि में 3,981 नए मामले सामने आने के साथ पश्चिम बंगाल में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 3,85,589 तक पहुंच गई.

बुलेटिन में कहा गया कि राज्य में अब 35,444 मरीज उपचाराधीन हैं जबकि पिछले 24 घंटे के दौरान 44,176 नमूनों की जांच की गई.
दुर्गा पूजा के बाद राज्य में बढ़े हैं मामले
पिछले दिनों बंगाल के प्रमुख पर्व दुर्गा पूजा उत्सव के बाद से ही राज्य में मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है. बंगाल के अलावा दिल्ली, केरल और मणिपुर में भी कोरोना के मामले बढ़े हैं.

तीन अक्टूबर से तीन नवंबर के बीच पश्चिम बंगाल में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 26,865 से बढ़कर 36,576, केरल में 77564 से बढ़कर 86,792, दिल्ली में 26,450 से बढ़कर 33,308 और मणिपुर में 2336 से बढ़कर 3568 हो गयी. 

इन राज्यों में बढ़ते मामलों को देखते हुए पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने हालात की समीक्षा की थी जिसमें राज्यों को टेस्टिंग संख्या बढ़ाने की सलाह दी गई थी. राज्य के अधिकारियों को सलाह दी गई थी कि जांच, निगरानी और इलाज की रणनीति का सख्ती से पालन करें तथा जांच को लेकर कोई समझौता नहीं करें और आरटी-पीसीआर परीक्षणों पर अधिक जोर दें. इसके अलावा देखभाल और प्रारंभिक पहचान के साथ ही मरीजों को जल्दी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए एक उचित मानक सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई.


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