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बस्तर की एकमात्र महिला रिपोर्टर पुष्पा रोकड़े, मिली जान से मारने की धमकी, द नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया इंडिया (एनडब्ल्यूएमआई) ने जताई चिंता

लगातार बर्बरता और मुखबिरी के आरोप से करदी जाती है पत्रकारों की हत्या से पत्रकार संगठन में कई बार नियमों और सुरक्षा को लेकर उठते है सवाल, राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून के संदर्भ में इस बयान में कहा गया, ‘छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विवादास्पद मसौदे को दिसंबर 2020 में अंतिम रूप दिया गया, जिसका उद्देश्य पत्रकारों को बिना डरे और बिना किसी दबाव में काम करने देना है लेकिन पुष्पा रोकड़े जैसी स्थानीय महिला पत्रकार, जो इसी इलाके में रहती और काम करती हैं, उनके लिए यह दूर की कौड़ी जैसा है.’ ऐसा पहले भी कई बार हो चूका है की कई श्रेस्ठ पत्रकारों को खबर देने की कीमत अपनी जान से चुकानी पड़ती है,बात गौरि लंकेश की हो या साईं रेड्डी की,

छत्तीसगढ़ के बस्तर के बीजापुर में एकमात्र आदिवासी महिला पत्रकार पुष्पा रोकड़े को जान से मारने की मिल रही धमकियों को लेकर द नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया इंडिया (एनडब्ल्यूएमआई) ने चिंता व्यक्त की है है.मीडिया संगठन ने पत्रकारों को उनका काम करने से रोकने के लिए डराने और धमकाने के सभी प्रयासों की भी निंदा की है.एनडब्ल्यूएमआई ने बयान जारी कर कहा कि पुष्पा को 13 दिसंबर 2020 को जान से मारने की धमकी मिली थी जिस पर कथित तौर पर माओवादी दक्षिण बस्तर पामेड एरिया समिति के हस्ताक्षर थे.इस धमकी भरे पत्र को बीजापुर जिले में पुस्कुंटा गांव के पास एक पेड़ पर लगाया गया था. इसके बाद 28 जनवरी 2021 को पुष्पा को एक बार फिर जान से मारने की धमकी दी गई, इस बार भी हाथ से लिखे गए नोट पर यह धमकी दी गई. यह भी कथित तौर पर माओवादी धड़े द्वारा दी गई थी.नोट में पुष्पा पर पुलिस की मुखबिर होने का आरोप लगाया गया, जिसमें कहा गया था कि वह विरोध प्रदर्शन रैलियों के बारे में पुलिस को जानकारियां देती हैं.


रिपोर्टर पुष्पा रोकड़े बस्तर की एकमात्र महिला रिपोर्टर प्रखर समाचार’ अखबार में रिपोर्टर थीं लेकिन इसके बीजापुर संस्करण के बंद होने के बाद उनकी नौकरी चली गई थी.पुष्प रोकड़े के बारे में कई अलग अखबारों में भी खबर छापी गयी थी जिसके बाद से यह मामला पत्रकारों और मीडिया से ज्यादा दूर नहीं गया क्यूंकि सुरक्षा के घेरे से खबर का कार्य दुगनी तेजी से अलग हो जाता रहा है, 2013 की रिपोर्ट के मुताबिक, संदिग्ध सशस्त्र माओवादियों ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के एक साप्ताहिक बाजार मे पत्रकार साईं रेड्डी की बर्बर हत्या कर दी थी.

राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून के संदर्भ में इस बयान में कहा गया, ‘छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विवादास्पद मसौदे को दिसंबर 2020 में अंतिम रूप दिया गया, जिसका उद्देश्य पत्रकारों को बिना डरे और बिना किसी दबाव में काम करने देना है लेकिन पुष्पा रोकड़े जैसी स्थानीय महिला पत्रकार, जो इसी इलाके में रहती और काम करती हैं, उनके लिए यह दूर की कौड़ी जैसा है.’

एनडब्ल्यूएमआई ने कहा कि वह पुष्पा रोकड़े के साथ एकजुटता से खड़े हैं और बस्तर की अनकही कहानियों को बताने के लिए उनकी प्रतिबद्धता का समर्थन करते हैं.इस बयान में छत्तीसगढ़ के मीडिया घरानों से भी आग्रह किया गया कि वे अपने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए हर तरीके से सामूहिक काम करें और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करें और उन्हें रोजगार सुरक्षा दें ताकि वे बिना किसी डर या पक्षपात के काम कर सकें.


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