ब्लैक होल एक्रीशन डिस्क से हवाओं की संभावित उत्पत्ति के बारे में अनुसंधान
जैसे ही किसी ब्लैक होल की ओर गैस और धूल गिरती है, वे इसके चारों ओर एक डिस्क बना लेते हैं। डिस्क में इन सामग्रियों का ढेर लगने पर, यह लाखों डिग्री से अधिक तापमान तक गर्म होताहै। अंदर की ओर गिरते इन तत्वों का एक अंश हवाओं के रूप में बाहर की ओर निकाल दिया जाता है।
वैज्ञानिकों ने हवा के इस उत्पादन और इसके ब्लैक होल के चारों ओर विसरित घूमने वाली सामग्रियों के डिस्क,जिसे एक एक्रीशन डिस्क कहा जाता है,द्वारा संचालित होने के बारे में पता लगायाहै। हवा के कारण बाहर की ओर बहने वाले पदार्थ कोइन ब्लैक होल का पोषण करने वाले क्षेत्र के उदभव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले परिवेश को दूषित करना चाहिए। लिहाजा, इस तरह की प्रक्रिया को शुरू किये जा सकने के बारे में पता लगाया जाना चाहिए। हालांकि ये प्रक्रियाएं अभी भी सैद्धांतिक पूर्वानुमान के स्तर पर ही हैं, लेकिन इसके बारे में आम सहमति नहीं बन पाई है।आकाशगंगा की नाभिक से घने वायु कोबहा कर और आकाशगंगा के प्रभामंडल से भीतर की ओर बहाव को रोक कर, हवाएं ब्लैक होल के मेजबान आकाशगंगा के विकास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए इन हवाओं का उत्पादन तंत्र और उन्हें संचालित करने वाले तत्व से जुड़ा रहस्य एक लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिएकौतूहल का विषयहै, क्योंकि इससे उन्हें मेजबान आकाशगंगाओं के बारे में पता लगाने में मदद मिलती है।
आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस (एरीज),जोकि भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी)के तहत एक स्वायत्त संस्थान है,के वैज्ञानिकों ने अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर हवा के उत्पादन की इस प्रक्रिया और ब्लैक होलएक्रीशन डिस्क कही जानेएक विशालकाय केंद्रीय पिंड के चारों ओर सर्पिल गति में फैलने वाली विसरित सामग्री से होने वाले विकिरण द्वारा उसके संचालन के बारे में स्वदेशी रूप से विकसितसंख्यात्मकअनुरूपता तकनीक (नुमेरिकल सिमुलेशन टेकनीक) का उपयोग करके एक समयबद्ध अध्ययन किया।
वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या विकिरण के बहाव द्वारा संचालित हवा के प्रवाह पर विकिरण जनित कर्षण प्रभाव (रेडिएशन ड्रैग इफ़ेक्ट),जोकि एक गतिमान पत्थर या नीचे की ओर उतरते एक पैराशूट के विरुद्ध हवा द्वारा लगाए गए प्रतिरोध के समान एक गति प्रतिरोधक प्रभाव है, हावी हो सकता है। यह प्रभाव तब उत्पन्न होता है जब विकिरण एक गतिशील माध्यम में प्रवेश करता है और विकिरण ऊर्जा घनत्व, विकिरण के दबाव के विभिन्न घटकों और हवा के वेग से संबंधित घटकों का समानुपाती होता है।
इस शोध का नेतृत्व कोलकाता स्थित बोस इंस्टीट्यूटके सानंद रायचौधरी ने इज़राइल केबार इलान यूनिवर्सिटी के मुकेश के व्यासऔर आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंस (एरीज)के इंद्रनील चट्टोपाध्याय के साथ मिलकर किया और हाल ही में इस शोध को मंथली नोटिसेस ऑफ़ रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी(एमएनआरएएस)नाम की वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है। शोधकर्ताओं ने आकाशगंगा के परिवेश का अध्ययन करने के उद्देश्य सेब्लैक होलएक्रीशन डिस्कसे बहने वाले हवा के प्रवाह को अनुरूप करने के लिए डॉ. चट्टोपाध्याय द्वारा पूर्व में विकसित किए गए एक संख्यात्मक अनुरूपता (नुमेरिकल सिमुलेशन) कोडका उपयोग उसमें उपयुक्त संशोधन करते हुए किया है।