कोरोना काल : रुकी नोटो की छपाई और महंगा हुआ हेल्थ इंश्योरेंस..
कोरोना महामारी के बढ़ते खतरे को देखते हुए महाराष्ट्र
के नासिक में करेंसी नोटों की छपाई रोक दी गई है. एहतियातन महाराष्ट्र में
ब्रेक द चेन (Break the chain) मुहिम के तहत ये कदम उठाया गया है. यहां
नोटों की छपाई 30 अप्रैल तक बंद कर दी गई है.नासिक की करेंसी सिक्योरिटी प्रेस और इंडिया सिक्योरिटी प्रेस में 30
अप्रैल तक काम बंद कर दिया गया है. इन दोनों ही प्रेस में इस दौरान सिर्फ
जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी ही काम करेंगे, जैसे- फायर ब्रिगेड, पानी
की सप्लाई और मेडिकल सेवाओं से जुड़े कर्मचारी ही अपनी-अपनी शिफ्ट में काम
करेंगे..
इस दौरान नोटों की छपाई से जुड़े लोग नहीं आएंगे इसलिए नोटों की छपाई पूरी
तरह बंद रहेगी. आपको बता दें कि भारत में सर्कुलेट होने वाले करीब 40
परसेंट नोट नासिक के करेंसी नोट प्रेस (CNP) में ही छपते है. इन दोनों ही
कंपनियों में करीब 3000 कर्मचारी काम करते हैं. इन कर्मचारियों और इनके
परिजनों की सेहत की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है.
सरकार ने पिछले साल जब नोटों की छपाई बंद की थी तब लोगों से अपील की थी कि
वो कैश की बजाय डिजिटल लेन-देन पर ज्यादा फोकस करें. दरअसल, नोटों से वायरस
फैलने का भी खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि कुछ लोग नोट गिनते समय थूक का
इस्तेमाल करते हैं, जो कि बेहद खतरनाक है. इसलिए बेहतर होगा आप लेन-देन में
नोटों की जगह डिजिटल मोड का इस्तेमाल करें.
कोरोना के चलते बीमा कंपनियों की भी कमर टूट चुकी है. क्योंकि कंपनियों को
कोविड से जुड़े अबतक 15,000 करोड़ रुपये के क्लेम मिल चुके हैं. बीमा
कंपनियों को लगता है कि कोरोना महामारी अभी आगे भी जारी रह सकती है, इसलिए
आगे क्लेम भी ज्यादा आएंगे.
देश में अब रोजाना 2 लाख से ऊपर कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं, जो कि
अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इसी को देखते हुए जनरल इंश्योरेंस कंपनियां और
हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां एक बार फिर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम
बढ़ाने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के मुताबिक सभी इंश्योरेंस कंपनियों
ने मिलकर इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI से हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम में
10 परसेंट की बढ़ोतरी करने की मंजूरी मांगी है.
अगर IRDAI ने बीमा कंपनियों की सिफारिश को मान लिया तो पहले से ही परेशान
लोगों के लिए खर्चों में और इजाफा हो जाएगा. बीमा कंपनियां सभी तरह के
हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट में 10 परसेंट तक बढ़ोतरी करना चाहती है. दरअसल,
कोरोना की वजह से इंश्योरेंस क्लेम में इजाफा हुआ है, लेकिन बीमा कंपनियों
ने प्रीमियम नहीं बढ़ाया है, जिसकी वजह से उन पर काफी दबाव है
बीमा कंपनियां प्रीमियम में इस बढ़ोतरी को कोविड 19 सेस के नाम पर करना
चाहती है. कंपनियों की दलील है कि कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी के बाद
उनके क्लेम में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. अब जिस तरह से कोरोना की दूसरी लहर
का प्रकोप चल रहा है, आगे भी क्लेम आने की संभावना है.
अभी तक सभी इंश्योरेंस कंपनियों के पास कोविड से जुड़े 15000 करोड रुपए के
क्लेम आए है, जिसमें से वो 9000 करोड़ रुपये सेटल भी कर चुकी हैं. दरअसल,
मार्च में जब इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम में बढ़ोतरी करना चाह रही थीं,
तब इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने मौजूदा पॉलिसी में बेनिफिट या ऐडऑन जोड़कर
प्रीमियम बढ़ोतरी करने पर रोक लगा दी थी. लेकिन इस बार कंपनियां इस दबाव
को सहने के मूड में नहीं है.