कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए धार्मिक, राजनीतिक घटनाओं (राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव), और सामाजिक समारोह जिम्मेदार : रिपोर्ट
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मृत्यु संख्या संक्रमण दरों में अंतराल है,
और संक्रमण बढ़ने के रूप में वृद्धि होने की संभावना है। पिछले एक साल
में 215 जिले ऐसे हैं, जो केस इन्फेक्शन के मामले में टॉप 10 फीसदी में
शामिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी लहर भी अब तक भौगोलिक रूप से
अधिक जटिल रही है। पिछले साल जब पहली लहर चरम पर थी तब 75 फीसदी मामले 60
से 100 जिलों से दर्ज हो रहे थे. जबकि इस बार इतने ही प्रतिशत केस 20 से 40
जिलों में मिल रहे हैं।
रिपोर्ट की माने तो दूसरी लहर के चलते संक्रमण की रफ्तार भले ही तेज हो गई
हो, लेकिन मृत्यु दर पिछली बार के मुकाबले काफी कम है। मार्च 2020 में
महामारी की शुरुआत के बाद से समग्र मामला मृत्यु अनुपात (सीएफआर) लगभग 1.3
प्रतिशत बताया गया है, जबकि 2021 की शुरुआत से वायरस का अनुबंध करने वाले
रोगियों के बीच सीएफआर 0.87 प्रतिशत से काफी कम है। रिपोर्ट में कहा गया कि
अनंतिम रूप से, ऐसा लगता है कि सीएफआर दूसरी लहर में कम प्रतीत होता है।
लगातार बढ रहे कोरोना संक्रमित मामलों के चलते अस्पतालों में बेड की भी
किल्लत हो गई है। हालात तो यह बन गए हैं कि श्मशान घाटो में चिताएं जलाने
की भी जगह नहीं बची है। इस हाहाकार के बीच लैंसेट कोविड -19 आयोग की इंडिया
टास्क फोर्स की एक रिपोर्ट सामने आई है, जो कुछ राहत देती दिखाई दे रही
है।
लैंसेट ने यह भी सुझाव दिया कि कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते कम से कम
अगले दो महीने के लिए इनडोर गैदरिंग पर पूरी तरह से बैन होना चाहिए। बैन से
भारत में कोरोना संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकेगा। रिपोर्ट में धार्मिक,
राजनीतिक घटनाओं (राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव), और सामाजिक
समारोहों (शादी, खेल आयोजन) को कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार
ठहराया गया था।