रोजगार व काम धंधों के लिहाज़ से नुकसान पर महामारी के कारण घटी फिज़ूलखर्ची...जीडीपी के 22.5 फीसदी तक पहुंची घरेलू बचत
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विस की एक रिपोर्ट में यह बात
कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020-21 में घरेलू बचत जीडीपी के
22.5% के बराबर हो गई है। कोरोना महामारी शुरू होने से पहले 2019 में देश
की घरेलू बचत जीडीपी की 19.8 प्रतिशत थी। रिजर्व बैंक के डेटा के हवाले से
तैयार इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2020 की अप्रैल-जून तिमाही में, जब
देश में सख्त लॉकडाउन था, घरेलू बचत सबसे कम जीडीपी की 5.8% थी।तब यह कोविड पूर्व के स्तर से लगभग आधी थी। दिसंबर तिमाही में इसमें तेज
रिकवरी हुई और यह साल भर की सबसे ज्यादा जीडीपी की 13 फीसदी हो गई। रिजर्व
बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2020 की जून तिमाही में घरेलू गैर-वित्तीय बचत
जीडीपी की 21.4% रही और सितंबर तिमाही में यह 10.4% पर आ गई
कोरोना महामारी का सबसे बुरा असर छोटे रोजगार व काम-धंधों पर पड़ा है।
हालांकि इसका एक अच्छा संकेत यह सामने आया है कि पिछले साल ज्यादातर लोग
घरों में ही रहे इस कारण फिजूलखर्ची घट गई। इस कारण घरेलू बचत बढ़कर जीडीपी
के 22.5 फीसदी तक पहुंच गई।
बचत बढ़ना अच्छा संकेत हो सकता है, लेकिन कामधंधों व रोजगार की दृष्टि से
इसे अच्छा नहीं माना जा सकता। अर्थव्यवस्था में पूंजी का सतत प्रवाह बना
रहे और आय-व्यय बढ़ता रहे तो ही गतिशील अर्थव्यवस्था रह पाती है।