‘‘योगी नहीं, योग का कोका कोला’’ : भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल.....भाजपा नेता भी कर रहे हैं रामदेव से किनारा
एलोपैथ चिकित्सा पद्धति पर टिप्पणी को
लेकर आईएमए और बाबा रामदेव के बीच चल रही तनातनी के संबंध में बुधवार को
फेसबुक पर एक पोस्ट किया। इस पोस्ट में जायसवाल ने कहा ‘‘विगत कुछ दिनों से
एक अजीब प्रतियोगिता
हों रही
है।
एलोपैथी पर विवादित टिप्पणी को लेकर
योगगुरू रामदेव और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के बीच तनातनी जारी है।
केंद्र सरकार की ओर से दखल देने के बाद भी मामला शांत होता नहीं दिख रहा
है। आमतौर पर योगगुरु जिस भारतीय जनता पार्टी के करीबी माने जाते हैं उसके
भी कई दिग्गज नेता उनकी आलोचना करने लगे हैं। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा)
के वरिष्ठ नेता और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और
बिहार भाजपा अध्यक्ष डॉक्टर संजय जायसवाल ने रामदेव के बयान को
दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और हिमाचल प्रदेश के
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने योगगुरू स्वामी रामदेव के एलोपैधी को
लेकर दिये गये बयान को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। कुमार ने कहा कि इस
विवाद से स्वामी रामदेव की ऐतिहासिक और उज्जवल छवि पर बड़ी आंच आ रही है
जिसके कारण देश के करोड़ों लोग बेहद व्यथित हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद
और ऐलोपैथी दोनों पद्धतियां मानवता की सेवा कर रही हैं। योग की तरह
आयुर्वेद भी भारत की एक बहुत बड़ी देन है। विश्वभर के डॉक्टरों वैज्ञानिकों
की तपस्या से ऐलोपैथी भी एक बहुत विकसित पद्धति बन गई है। ऐलोपैथी और
आयुर्वेद पद्धतियों का कोई मुकाबला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षबर्धन के प्रयासों से स्वामी रामदेव ने अपना
बयान वापस लिया है लेकिन उसी के साथ एक विवाद और शुरू हो गया है। अब यह
विवाद अदालतों में जाने लगा है। उन्होंने श्री हर्षबर्धन को फोन कर आग्रह
किया है कि वह इस विवाद को अतिशीघ्र सुलझाएं। यह विवाद जितना बढ़ेगा उतनी ही
देश की छवि को आंच आएगी।
वहीं बिहार भाजपा अध्यक्ष डॉक्टर संजय जायसवाल ने एलोपैथ चिकित्सा पद्धति पर टिप्पणी को लेकर बाबा रामदेव की बुधवार को खिंचाई की और चुटकी लेते हुए उन्हें ‘‘योगी नहीं, योग का कोका कोला’’ बताया।
उन्होंने बाबा रामदेव पर चुटकी लेते हुए कहा ‘‘बाबा रामदेव जी को मैं मजाक में योग का कोका कोला बोलता हूं। हमारे यहां ठंडे पेय के रूप में सदियों से शिकंजी और ठंडई का इस्तेमाल होता रहा है। पर अब हर घर में कोको कोला और पेप्सी ने जगह बना ली है। उसी प्रकार भारतवर्ष में हजारों अति विशिष्ट योग साधक रहे हैं जिन्होंने भारतीय संस्कृति एवं जीवन प्रणाली में मूलभूत परिवर्तन किए हैं पर योग को घर-घर पहुंचाने मे बाबा रामदेव के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है।’’
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैं अपने आईएमए के सभी मित्रों से अपील करता हूं कि कृपया हम निरर्थक बातों में प्रतियोगिता कर अपने वर्षों की साधना को बर्बाद नहीं करें। उन सभी मेडिकल चिकित्सकों जिन्होंने इस करोना काल में जान गंवाई है उनको यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।’’
वहीं इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी रामदेव को चिट्ठी लिखकर बयान वापस लेने की अपील की थी।पत्र में लिखा था, 'एलोपैथिक दवाओं और डॉक्टरों पर आपकी टिप्पणी से देशवासी बेहद आहत हैं। लोगों की इस भावना से मैं आपको फोन पर पहले ही अवगत करा चुका हूं। संपूर्ण देशवासियों के लिए कोरोना के खिलाफ युद्धरत डॉक्टर और दूसरे स्वास्थ्य कर्मी भगवान के समान हैं। आपने अपने वक्तव्य से न केवल कोरोना योद्धाओं का निरादर किया, बल्कि देशवासियों की भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाई है। कल आपने जो स्पष्टीकरण जारी किया, वह लोगों की चोटिल भावनाओं पर मरहम लगाने में नाकाफी है।' उन्होंने आगे लिखा, 'कोरोना महामारी के संकट भरे दौर में एलोपैथी और उससे जुड़े डॉक्टरों ने करोड़ों लोगों को जीवनदान दिया है। आपका यह कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लाखों कोरोना मरीजों की मौत एलोपैथी की दवा खाने से हुई। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना महामारी के खिलाफ ये लड़ाई सामूहिक प्रयासों से ही जीती जा सकती है। इस लड़ाई में हमारे डॉक्टर, नर्सें और दूसरे स्वास्थ्यकर्मी जिस तरह अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने में दिन-रात जुटे हैं, वह कर्तव्य और मानव सेवा के प्रति उनकी निष्ठा की अतुलनीय मिसाल है।'
क्या है मामला?
उल्लेखनीय है कि गत दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें बाबा रामदेव एलोपैथी चिकित्सा पद्धति को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक देते नज़र आ रहे हैं। उनके इस बयान के बाद ही देशभर के डॉक्टरों में रोष बढ़ गया।