डेल्टा वेरिएंट प्लस के 90 से अधिक मामलों ने बढ़ाई चिंता...74 साल बाद अब 'जीका वायरस' ने भी बढ़ाया खतरा
हर जगह कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ते देखी जा सकती हैं। शायद इसी का
नतीजा है कि 9 दिनों बाद फिर से मौतों का आंकड़ा 1200 पार गया है। केरल और
महाराष्ट्र का आंकड़ा चिंताजनक है। इस बीच त्रिपुरा में डेल्टा वेरिएंट
प्लस के 90 से अधिक नए मामले सामने आने के बाद चिंताएं बढ़ गई हैं।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर कम होते देखकर विभिन्न राज्य सरकारों ने लॉकडाउन खत्म करना शुरू किया, लेकिन इसका नतीजा चिंताजनक रूप से सामने आया है। 9 दिन बाद फिर से मौतों का आंकड़ा 1200 पार गया है। इससे पहले 30 जून को 1002 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि कहा जा रहा है कि इसमें महाराष्ट्र के पुराने आंकड़े भी जोड़े गए हैं।
यह है मौजूदा स्थिति
पिछले 24 घंटे में 42 हजार से अधिक नए मामले मिले हैं। इसी दौरान 45 हजार
से अधिक लोग ठीक भी हुए। अब तक 3.07 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं। 2.99
करोड़ लोग ठीक भी हुए। इस समय 4.49 लाख एक्टिव केस हैं। हालांकि यह अच्छी
बात है कि यह आंकड़ा 105 दिन में सबसे कम हैं। इससे पहले 26 मार्च को यही
आंकड़ा कुछ हजार अधिक था। अब तक देश में संक्रमण से 4.07 लाख लोग जान गंवा
चुके हैं।
देश में कोरोना संक्रमण को लेकर इस समय केरल और महाराष्ट्र में हालात पूरी
तरह काबू में नहीं हैं। खासकर; केरल में जीका वायरस के 13 मरीज मिलने से चिंताएं और बढ़ गई हैं। केरल में पिछले 24 घंटे में 13500 से अधिक नए
मामले मिले हैं। यहां 130 लोगों की मौत हुई। महाराष्ट्र में 8900 से अधिक
नए मामले मिले। यहां मरने वाला का आंकड़ा 738 दिखाया गया है।
बता दें कि ब्राजील के मानौस स्थित फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ अमेजोनास के बायोलॉजिस्ट मार्सेलो गोर्डो ने इसे अगली महामारी बताकर चेताया है।
केंद्रीय टीम केरल पहुंची
जीका वायरस की मौजूदगी को देखते हुए विशेषज्ञों का 6 सदस्यीय केंद्रीय दल
केरल पहुंच गया है। इस बीच केरल के अलावा कर्नाटक सरकार ने भी जीका की
रोकथाम के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है।
मानसून में रखें खास ध्यान
कर्नाटक के हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर सर्विस डिपार्टमेंट ने एक गाइडलाइन
जारी की है। इसमें कहा गया है कि मानसून सीजन में इन मच्छरों के पैदा होने
की गुंजाइश अधिक रहती है, इसलिए खास ध्यान रखने की जरूरत है।
अगली महामारी बन सकता है
ब्राजील के मानौस स्थित फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ अमेजोनास के बायोलॉजिस्ट
मार्सेलो गोर्डो ने इसे अगली महामारी बताकर चेताया है। वहीं, फियोक्रूज
अमेजोनिया बायोबैंक की जीव विज्ञानी अलेसांड्रा नावा ने कहा कि इंसानों के
जंगलों पर कब्जा करने से वहां मौजूद वायरस, बैक्टीरिया आदि इंसानों पर
हमलावर हो गए हैं। कोरोना वायरस भी इसी का उदाहरण है, जो चीन से निकला।
अफ्रीका से एशिया तक फैला है यह संक्रमण
जीका वायरस का असर अफ्रीकी देशों से लेकर एशिया तक दिखाई देता है। यह 2014
में प्रशांत महासागर से फ्रेंच पॉलीनेशिया तक और फिर 2015 में मैक्सिको और
मध्य अमेरिका तक जा पहुंचा।
- यह हैं लक्षण :बुखार, सिर दर्द और शरीर पर लाल निशान, जोड़ों में दर्द आदि।
- ऐसे फैलता है: यह संक्रमण एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है। ये वो ही मच्छर हैं, जो डेंगू और चिकनगुनिया फैलाते हैं। एडीज मच्छर दिन में काटते हैं।
- पहला मामला: इस वायरस का पहला मामला युगांडा में 1947 में बंदरों में देखा गया था।1952 में युगांडा और यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया में पहली बार यह वायरस किसी इंसान में मिला था।