पत्नी के शरीर को पति द्वारा अपनी संपत्ति समझना वैवाहिक बलात्कार है: हाईकोर्ट
केरल उच्च न्यायालय ने कहा है कि पत्नी के शरीर को पति द्वारा अपनी
सम्पत्ति समझना और उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाना वैवाहिक बलात्कार
है. अदालत ने पारिवारिक न्यायालय के तलाक की मंजूरी देने के फैसले को
चुनौती देने वाली एक व्यक्ति की दो अपीलें खारिज करते हुए यह टिप्पणी की.
न्यायमूर्ति ए. मोहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने
कहा कि शादी और तलाक धर्मनिरपेक्ष कानून के तहत होने चाहिए और देश के
विवाह कानून को फिर से बनाने का समय आ गया है. पीठ ने कहा कि दंडात्मक
कानून के तहत वैवाहिक बलात्कार को कानून मान्यता नहीं देता, केवल यह कारण
अदालत को तलाक देने के आधार के तौर पर इसे क्रूरता मानने से नहीं रोकता है.
इसलिए, हमारा विचार है कि वैवाहिक बलात्कार तलाक का दावा करने का ठोस आधार
है.अदालत ने क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका स्वीकार करने वाले
पारिवारिक न्यायालय के फैसले के खिलाफ पति की अपील खारिज कर दी. इसके अलावा
अदालत ने पति द्वारा वैवाहिक अधिकारों की मांग करने वाली एक अन्य याचिका
को खारिज कर दिया. अदालत ने अपने 30 जुलाई के आदेश में कहा कि पत्नी के
शरीर को पति द्वारा अपनी संपत्ति समझना और उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध
बनाना वैवाहिक बलात्कार है.