तीन तलाक, समलैंगिगता, जस्टिस नरीमन ने सुनाए ऐतिहासिक फैसले...सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत
निजता को मौलिक अधिकार घोषित करने, आसानी से गिरफ्तारी की शक्ति देने वाले आईटी अधिनियम के प्रावधान को निरस्त करने और सभी उम्र की महिलाओं को केरल के सबरीमला मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने समेत सात वर्षों से अधिक समय तक अपने कई ऐतिहासिक फैसलों से न्यायपालिका को समृद्ध करने के बाद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन बृहस्पतिवार को सेवानिवृत्त हो गये। न्यायमूर्ति नरीमन, प्रख्यात न्यायविद फली नरीमन के बेटे हैं। वह एक पारसी पुजारी हैं और उन पांच वकीलों के उस समूह में थे, जो वकालत के अपने सफल पेशे को छोड़ कर सात जुलाई 2014 को शीर्ष अदालत की पीठ में सीधे तौर पर शामिल हुए थे।
दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की उपाधि हासिल करने के बाद न्यायमूर्ति नरीमन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएल.बी और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एलएलएम की उपाधि हासिल की थी तथा 45 वर्ष की आयु की बजाये 37 वर्ष की आयु में ही उन्हें एक वरिष्ठ अधिवक्ता का ओहदा मिल गया था।
दरअसल, 1993 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एम एन वेंकटचलैया ने वरिष्ठ
अधिवक्ता के उस नियम में संशोधन किया था, जो किसी वकील को इस तरह का ओहदा
देने के लिए न्यूनतम आयु 45 वर्ष निर्धारित करता था। उनकी सेवानिवृत्ति के
साथ शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या घट कर 25 रह जाएगी, जबकि
प्रधान न्यायाधीश सहित मंजूर पदों की संख्या 34 है। इसके साथ ही, अब उच्चतम
न्यायालय कॉलेजियम का पुनर्गठन करना होगा और इसमें न्यायमूर्ति एल
नागेश्वर राव का प्रवेश होगा।
न्यायाधीश बने न्यायामूर्ति नरीमन ने
13,500 से ज्यादा मामलों का निस्तारण किया है। वह उन पीठों में शामिल थे
जिन्होंने 1,000 से अधिक फैसले दिये हैं और यहां तक कि उनकी सेवानिवृत्ति
से कुछ दिन पहले ही उन्होंने दो महत्वपूर्ण फैसले सुनाए, जिनमें एक फैसले
का देश में वाणिज्यिक और राजनीतिक परिदृश्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।
जस्टिस नरीमन ने सुनाए ऐतिहासिक फैसले
सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत
समलैंगिकता अपराध नहीं
आईटी ऐक्ट की धारा-66 ए को रद्द किया
तीन तलाक खत्म करने का फैसला
निजता का अधिकार मौलिक अधिकार
इनके
अलावा राजनीति के अपराधीकरण पर रोक लगाने के एक अभूतपूर्व फैसले में
न्यायमूर्ति नरीमन ने 10 अगस्त को बिहार में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी
(भाजपा) और जनता दल (यूनाइटेड) सहित नौ राजनीतिक दलों को न्यायालय की
अवमानना का दोषी ठहराया तथा शीर्ष न्यायालय के फरवरी 2020 के एक आदेश का
उल्लंघन करने को लेकर उनपर जुर्माना लगाया।