नाक से दिए जाने वाले कोविड वैक्सीन को दूसरे चरण के ट्रायल के लिए मिली नियामक मंजूरी
भारत बॉयोटेक ने नाक से दी जाने वाली कोविड वैक्सीन विकसित
की है। भारत बायोटेक का इंट्रानैसल वैक्सीन नाक के जरिए दिया जाने वाला टीका है
जिसे चरण 2 के परीक्षणों के लिए नियामक
अनुमोदन प्राप्त हुआ है। यह भारत में मानव नैदानिक परीक्षणों से गुजरने वाला अपनी
तरह का पहला कोविड -19 खुराक है। बीबीवी 154 एक नाक के जरिए दिया जाने योग्य प्रतिकृति-अल्पता (इंट्रानैसल
रेप्लिकेशन-डेफिसिएन्ट) वाले चिंपैंजी एडेनोवायरस एसएआरएस –सीओवी -2 वेक्टरीकृत वैक्सीन है। बीबीआईएल के पास अमेरिका के सेंट लुइस में वाशिंगटन
विश्वविद्यालय से इसके लिए इन-लाइसेंस तकनीक प्राप्त है।
चरण 1 क्लिनिकल परीक्षण 18 से 60 वर्ष के आयु समूहों में पूरा किया गया है। कंपनी की सूचना यह है कि पहले चरण के क्लिनिकल परीक्षण में स्वस्थ स्वयंसेवकों को दी जाने वाली वैक्सीन की खुराक को अच्छी तरह से सहन किया गया है। इसके किसी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी नहीं मिली । इससे पहले इस वैक्सीन को पूर्व- नैदानिक विषाक्तता अध्ययनों (प्री-क्लिनिकल टॉक्सिसिटी स्टडीज) में सुरक्षित, प्रतिरोधी ( इम्युकी नोजेनिक) और अच्छी तरह से सहन करने योग्य पाया गया था। वैक्सीन जानवरों के अध्ययन में उच्च स्तर के न्यूट्रलाइज़िंग एंटीबॉडीज को प्राप्त करने में सक्षम पाई गई थी।