मिड डे मील का नाम बदला, अब स्कूलों में होंगे कुकिंग कम्पीटीशन
Mid-Day Meal Scheme : स्कूली बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के कार्यक्रम नेशनल प्रोग्राम फॉर मिड-डे मील का नाम बदल दिया गया है. मिड-डे मील स्कीम अब प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण स्कीम हो गया है. नाम बदलने के साथ इस स्कीम के दायरे में भी बदलाव किया गया है. नए नाम के साथ इस स्कीम के जरिए अब प्री प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ने वाले या बाल वाटिकाओं में पढ़ने वाले बच्चों को भी ताजा और गर्म भोजन मुहैया कराया जाएगा. अभी तक मिड-डे मील स्कीम के तहत पहली से आठवीं तक के बच्चों को भोजन दिया जाता था. मिड-डे मील के दायरे में बदलाव से 11 लाख 20 हजार स्कूलों में पढ़ रहे करीब 11 करोड़ 80 लाख अतिरिक्त बच्चों को भोजन मिलेगा.
नाम और दायरा बढ़ाने के साथ इस स्कीम में और भी कई बदलाव किए गए हैं. इसमें स्थानीय महिलाओं की भागीदारी, बागवानी को प्रोत्साहित करने, भोजन पकाने की प्रतियोगिता और स्कूली बच्चों विशेषकर एनीमिक बच्चों के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों पर ध्यान देने जैसी चीजें शामिल हैं.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि भारत सरकार प्रधानमंत्री पोषण योजना पर अगले पांच साल में 99,061.73 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इसमें खाद्यान्न की लागत शामिल है. उन्होंने कहा कि तिथि भोजन की शुरुआत, सोशल ऑडिट, स्कूल पोषण उद्यान और कई अन्य उपायों के जरिए इस स्कीम के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद मिलेगी.
स्कूलों में बनेंगे पोषण उद्यान
शिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार स्कूली बच्चों की सक्रिय भागीदारी के जरिए स्कूलों में पोषण उद्यान विकसित करने पर विचार कर रही है. अभी फिलहाल करीब तीन लाख स्कूलों में पोषण उद्यान विकसित किए गए हैं. पोषण उद्यान विकसित करने का मकसद बच्चों को सूक्ष्म पोषक तत्वों की अतिरिक्त मात्रा उपलब्ध कराना है.