देश भर में 260 आईआरएस का तबादला, 189 को दिया गया एडिशनल चार्ज
केंद्र सरकार ने आयकर कमिश्नर स्तर के देश भर के 260 आईआरएस अफसरों का एक
साथ तबादला/नियुक्ति करने का आदेश जारी किया है। कई पूर्व आईआरएस अफसरों ने
इसे नीतिगत लकवा, सत्ता के उच्च गलियारों में शासन की कमी और पीएमओ का
केंद्रीकरण करार दिया है। जिन अफसरों को इधर-उधर किया गया है उनका स्तर
भारत सरकार में संयुक्त सचिव (वेतनमान में 14वें स्तर) का है।वित्त
मंत्रालय के अधीन काम करने वाले आयरकर विभाग के नीतिगत मामलों और प्रशासन
में सर्वोच्च संस्था केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के आदेश
संख्या 270 के जरिए 189 अधिकारयों को सीआईटी/डीआईटी ग्रेड में अतिरिक्त
कार्यभार भी दिया गया है।
पूर्व आईआरएस अफसरों ने इस आदेश में विशेष तौर से इंगित किया है कि
इसमें 95 ऐसे अफसर भी शामिल हैं जिनकी इसी साल 22 अप्रैल 2021 को ‘इन सीटू’
आधार पर सीआईटी ग्रेड में पदोन्नत किया गया था। इसका अर्थ है कि इन अफसरों
को पदोन्नति के बावजूद जूनियर रैंक पर 6 महीने और काम करने को मजबूर किया
गया था।चीफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स के पद से सेवानिवृत्त एक आईआरएस अधिकारी
ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि, “आईआरएस अधिकारी आयकर आयुक्त के ग्रेड
में आने से पहले देश भर के कस्बों और शहरों में लगभग 20 वर्षों या उससे
अधिक समय तक परिश्रम के साथ सेवा करते हैं। आयकर कमिश्नर एक ऐसा पद है जो
तकनीकी रूप से उन्हें विभाग का प्रमुख बनाता है और उन्हें अधिकारिक कार
जैसे भत्तों का हकदार बनाता है जो संयोगवश उनके साथी आईएएस और आईपीएस
अधिकारियों को सेवा के पहले दिन से मिलते हैं। आईआरएस अधिकारी सेवा के पहले
दिन से इसकी कोशिश करते हैं।”
इस अधिकारी ने कहा
कि, “ऐसे में इन अधिकारियों को जूनियर पद पर और कुछ महीनों के लिए काम
कराना न सिर्फ उनके मनोबल को गिराना है बल्कि राजस्व वसूली को भी प्रभावित
करता है, क्योंकि वे इन हालात में अपने काम पर आखिर कैसे फोकस कर सकते हैं।
इससे सरकारी पैसे का भी नुकसान होता है क्योंकि उन्हें उच्च पद का वेतन तो
मिलता ही है। इसे आखिर नीतिगत लकवा नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे।”
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