रक्तचाप में ऊपर का 120 और नीचे का 80… ये सब क्या होता है? आखिर इसका क्या मतलब है
जब भी आप रक्तचाप मापने जाते है तो दो तरह की रीडिंग बताई जाती है, जैसे- 120-80. इन दो रीडिंग के हिसाब से ब्लड सर्कुलेशन के बारे में पता किया जाता है, इससे पता चलता है कि ब्लड प्रेशर कितना होता है. आपने देखा होगा कि अन्य टेस्ट की रीडिंग सिर्फ एक डिजिट में ही आती है, जैसे शुगर आदि.
दो रीडिंग किस-किस की होती है?- दरअसल, दो तरह के ब्लड प्रेशर होते हैं. एक होता है, सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और एक होता है डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर. अगर आम भाषा में समझें तो जिसे आप ऊपर का ब्लड प्रेशर कहते हैं वो है सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर. वहीं, जिसे लोग नीचे वाला ब्लड प्रेशर कहते हैं, वो डायस्टोलिक प्रेशर होता है.
दो रीडिंग किस-किस की होती है?- दरअसल, दो तरह के ब्लड प्रेशर होते हैं. एक होता है, सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और एक होता है डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर. अगर आम भाषा में समझें तो जिसे आप ऊपर का ब्लड प्रेशर कहते हैं वो है सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर. वहीं, जिसे लोग नीचे वाला ब्लड प्रेशर कहते हैं, वो डायस्टोलिक प्रेशर
आप अगर मशीन में भी देखेंगे तो एक रीडिंग के आगे SYS लिखा होता है, जो सिस्टोलिक है और एक रीडिंग के आगे DIA लिखा होता है, जिसका मतलब है डायस्टोलिक प्रेशर यानी नीचे वाली रीडिंग.
आप अगर मशीन में भी देखेंगे तो एक रीडिंग के आगे SYS लिखा होता है, जो सिस्टोलिक है और एक रीडिंग के आगे DIA लिखा होता है, जिसका मतलब है डायस्टोलिक प्रेशर यानी नीचे वाली रीडिंग.
क्या है इनका मतलब?- इसमें सिस्टोलिक का मतलब है कि जब दिल खून को पंप कर रहा होता है और डायस्टोलिक का मतलब है एक पंप से दूसरे पंप के बीच का वक्त. दरअसल, खून को पंप करने या इसका सर्कुलेशन का काम दिल का ही होती है, इसलिए ब्लड प्रेशर भी दिल पर निर्भर करता है.
क्या है इनका मतलब?- इसमें सिस्टोलिक का मतलब है कि जब दिल खून को पंप कर रहा होता है और डायस्टोलिक का मतलब है एक पंप से दूसरे पंप के बीच का वक्त. दरअसल, खून को पंप करने या इसका सर्कुलेशन का काम दिल का ही होती है, इसलिए ब्लड प्रेशर भी दिल पर निर्भर करता है.
जब धमनियों पर जोर पड़ता है तो हाई ब्लड प्रेशर होता है और यह तेजी से करता है, इससे ही ब्लड प्रेशर हाई होती है. इससे दिल को ज्यादा जोर देना पड़ता है और दिल का काम बढ़ जाता है. वहीं, जब धमनियां धीरे-धीरे धड़कती है और खून का संचार पूरी तरह से शरीर में नहीं हो पाता है तो ब्लड प्रेशर कम हो जाता है.
जब धमनियों पर जोर पड़ता है तो हाई ब्लड प्रेशर होता है और यह तेजी से करता है, इससे ही ब्लड प्रेशर हाई होती है. इससे दिल को ज्यादा जोर देना पड़ता है और दिल का काम बढ़ जाता है. वहीं, जब धमनियां धीरे-धीरे धड़कती है और खून का संचार पूरी तरह से शरीर में नहीं हो पाता है तो ब्लड प्रेशर कम हो जाता है.