विशेषज्ञों को 2022 में ‘ओमीक्रोन’ के सबसे अधिक मामले सामने आने की आशंका, भारत में अभी तक 358 मामले आए सामने
भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के नए स्वरूप ‘ओमीक्रोन’ के 122 नए मामले सामने आने के बाद, देश में इस स्वरूप के मामले बढ़कर 358 हो गए। इनमें से 114 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं या अन्य स्थानों पर चले गए हैं। ये मामले 17 राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों में सामने आए। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि महाराष्ट्र में ‘ओमीक्रोन’ स्वरूप के सबसे अधिक 88 मामले, दिल्ली में 67, तेलंगाना में 38, तमिलनाडु में 34, कर्नाटक में 31 और गुजरात में 30 मामले सामने आए।
मंत्रालय की ओर से सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, भारत में एक दिन में कोविड-19 के 6,650 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,47,72,626 हो गई। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 77,516 रह गई है। 374 और संक्रमितों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 4,79,133 हो गई।कोरोना वायरस के नए एवं अधिक संक्रामक
स्वरूप ‘ओमीक्रोन’ के 2022 में सबसे अधिक मामले
सामने आ सकते हैं। वहीं, वायरस
के ‘डेल्टा’ स्वरूप की तुलना में
यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को अधिक मात दे रहा है। सिंगापुर के विशेषज्ञों का ऐसा
मानना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन
(डब्ल्यूएचओ) ने कोविड-19 वैश्विक
महामारी को अगले साल खत्म करने के लिए विश्व से एक साथ आने का आह्वान किया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक तेद्रोस अदहानोम ग्रेबेयेसस ने सोमवार को जिनेवा
में पत्रकारों से कहा था, ‘‘ 2022
वह वर्ष
होगा, जब हम वैश्विक
महामारी को पूरी तरह खत्म कर देंगे।’’
इसके विपरीत, सिंगापुर
के विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि ‘ओमीक्रोन’ स्वरूप कितना खतरनाक
है। साथ ही उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कब खत्म होगी, इसका पूर्वानुमान
लगाने की कोशिश करना ‘‘निरर्थक’’ है। जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं एसोसिएट प्रोफेसर नताशा हॉवर्ड ने कहा, ‘‘ ऐसा प्रतीत होता है
कि 2022 में विश्व में ‘ओमीक्रोन’ स्वरूप के सबसे अधिक
मामले सामने आएंगे।’’ उन्होंने कहा कि ‘ओमीक्रोन’ स्वरूप अधिक
संक्रामक है और ‘डेल्टा’ स्वरूप की तुलना में
यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को अधिक मात दे रहा है।
हॉवर्ड
ने कहा, ‘‘ ‘ओमीक्रोन’ के अधिक फैलने से, संक्रमण के मामले और
अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। इसके प्रभाव अब भी
स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन
इससे पता चलता है कि वैश्विक महामारी पर अभी तक काबू नहीं पाया गया है और कोविड-19 रोधी टीके लगवाने
तथा उसकी ‘बूस्टर’ खुराक के विश्व में
हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचने तक, नए
स्वरूपों के सामने आने की आशंका बनी रहेगी।’’