12वीं के नंबर के आधार पर नहीं मिलेगा सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एडमिशन, इसी साल शुरु होगा कॉमन एंट्रेंस टेस्ट
12वीं में कम मार्क्स होने की वजह से जिन छात्रों का देश के केंद्रीय विश्वविद्यालय में एडमिशन नहीं हो पाता था उनके लिए खुशखबरी है। क्योंकि अब देश की सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 12वीं के नंबर्स के आधार पर स्नातक (Graduation) में एडमिशन नहीं मिलेगा।
इसके लिए अब कॉमन एंट्रेंस टेस्ट कराया जाएगा। जो इसी साल से शुरु होने जा रहा है। हालांकि, सेंट्रल यूनिवर्सिटी में स्नातक में एडमिशन के लिए न्यूनतम अंकों की जरूरत पड़ेगी, लेकिन ज्यादा नंबर लाने वालों को दाखिले में मिल रही प्रथम वरीयता समाप्त हो जाएगी।
यानी उन्हें 12वीं में अधिक नंबर लाने का एडमिशन के वक्त कोई लाभ नहीं मिलेगा। क्योंकि यूजीसी (UGC) अब सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए एक परीक्षा (CUET) का आयोजित कर रहा है। इस परीक्षा में पास होने वाले परीक्षार्थियों को ही डीयू, बीएचयू, एएमयू समेत देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन में एडमिशन मिलेगा। सोमवार को इस संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने घोषणा की। यूजीसी के मुताबिक, कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी सीयूईटी (Common University Entrance Test -CUET) में प्राप्त अंकों के आधार पर ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एडमिशन लेगा।
देश भर में जितने भी केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, सबके लिए एक ही परीक्षा आयोजित की जाएगी। इससे पहले 12वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर दाखिला मिलता था, जिससे राज्य बोर्डों और ग्रामीण छात्रों को देश के प्रतिष्ठिक कॉलेजों में दाखिला मिलने में दिक्कत होती थी। लेकिन एडमिशन के लिए टेस्ट होने से ये दिक्कत समाप्त हो जाएगी।
बता दें कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एडमिशन के लिए इसी साल से प्रवेश परीक्षा शुरु होगी। यूजीसी ने कहा है कि सत्र 2022-23 से ही कॉमन एंट्रेंस टेस्ट लिया जाएगा। इस परीक्षा के आधार पर केंद्रीय विश्वविद्यालय और इससे संबंद्ध कॉलेजों में छात्रों को ग्रेजुएशन में एडमिशन मिलेगा। हालांकि केंद्रीय विश्वविद्यालयों को अपने विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए बोर्ड परीक्षा में प्राप्त एक न्यूनतम प्रतिशत को अपनाने का अधिकार होगा।
यानी विश्वविद्यालय यह तय कर सकता है कि 12वीं में इतने प्रतिशत से कम अंक वाले छात्रों को वे एडमिशन नहीं देंगे। हालांकि तब भी उसे सीयूईटी देना होगा। ऑडियो-विजुअल या परफॉर्मिंग आर्ट या एक्स्ट्रा करिकुलर और स्पोट्र्स कैटगरी में दाखिले के लिए यूनिवर्सिटी प्रैक्टिकल या ट्रायल को आधार बना सकती है।
इसके साथ ही यूजीसी ने इस प्रवेश परीक्षा के नाम में से केंद्रीय विश्वविद्यालय शब्द को हटा दिया है जिससे अगर डीम्ड या निजी विश्वविद्यालय चाहे तो इस परीक्षा में शामिल हो सकता है और इसी परीक्षा के आधार पर अपने संस्थानों में छात्रों को एडमिशन दे सकते हैं। कंप्यूटर आधारित यह परीक्षा जुलाई के पहले सप्ताह में आयोजित की जाएगी और इसका सिलेबस सीबीएसई में एनसीईआरटी पर आधारित होगा।