डेयरी कारोबार से जुड़े किसानों के लिए काम आएगी ये  योजना, 25... - CG Sandesh

डेयरी कारोबार से जुड़े किसानों के लिए काम आएगी ये योजना, 25 प्रतिशत तक मिलती है सब्सिडी

अपने देश में खेती  के साथ पशुपालन की पुरानी परंपरा रही है. किसान अपनी जरूरतों के लिए और खेती से अलग कमाई के लिए पशुपालन करते हैं. पशुपालन क्षेत्र में काफी संभवनाएं हैं और खासकर डेयरी कारोबार काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है. 

यहीं वजह है कि सरकार पशुपालन और डेयरी को आगे बढ़ाने के लिए काफी प्रयास कर रही है. इसके लिए केंद्र सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं, जिसमें किसानों को सब्सिडी देने का भी प्रावधान हैं. वे इनका लाभ लेकर अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं.

पशुपालन करने वाले किसान गोबर का इस्तेमाल जैविक खेती में करते हैं. इसी से कम्पोस्ट भी तैयार किया जाता है. लेकिन अगर आप जैविक खेती नहीं करते या कम्पोस्ट नहीं बनाना चाहते तब भी गोबर का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने के लिए खेतों में कर सकते हैं. वहीं अगर आपके पास गाय है तो गोमूत्र का कई रूपों में इस्तेमाल किया जा सकता है. इन्हीं वजहों से ये योजनाएं किसानों के लिए मददगार साबित हो रही हैं.

इसी तरह की एक योजना है डेयरी उद्यमिता विकास योजना. सरकार ने इसकी शुरुआत 1 सितंबर 2010 को की थी. योजना का उदेश्य डेयरी क्षेत्र की विकास दर को बढ़ाना, नए डेयरी उद्यमियों के लिए देश की अर्थव्यवस्था में प्रभावी योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन के लिए नए आधुनिक डेयरी फार्मों की स्थापना को बढ़ावा देना है.

इसके अलावा बछड़ा पालन को प्रोत्साहित करना, व्यावसायिक पैमाने पर दूध को संभालने के लिए गुणवत्ता और पारंपरिक तकनीक में सुधार करना भी योजना के उदेश्यों में शामिल है. 

साथ ही असंगठित क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन लाने के लिए ताकि प्रारंभिक स्तर पर दूध को प्रोसेस किया जा सके. इससे स्वरोजगार उत्पन्न होगा. मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचा प्रदान करने जैसे अन्य उदेश्यों की पूर्ति के लिए इस योजना को लागू किया गया है.

डेयरी उद्यमिता विकास योजना राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक द्वारा कार्यांवित की जाने वाली योजना है. यह योजना डेयरी क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन लाने के लिए छोटे डेयरी फार्म और अन्य सहायक स्थापना का विस्तार करती है. 

इस योजना के मुताबिक, डेयरी लगाने में आने वाले खर्च का 25 फीसदी कैपिटल सब्सिडी मिलती है. यह सब्सिडी अधिकतम 10 दुधारू पशुओं के लिए ही दी जाती है. इसके अलावा इस योजना के तहत दुग्ध उत्पाद बनाने की यूनिट शुरू करने के लिए भी सब्सिडी दी जाती है.

अगर आप दुग्ध उत्पादों की प्रोसेसिंग करना चाहते हैं तो इसके तहत उपकरण खरीद सकते हैं. पशुपालन में उपयोग की जाने वाली किसी मशीन को खरीदने में 13.2 लाख रुपए की लागत आती है तो इस योजना के तहत 25 फीसदी की कैपिटल सब्सिडी पशुपालक ले सकते हैं.

इस योजना के तहत दूध और दूध से बने उत्पाद के संरक्षण के लिए कोल्ड स्टोरेज यूनिट भी शुरू की जा सकती है. इसकी लागत पर भी सरकार आपको सब्सिडी प्रदान करती है. 

किसान, उद्यमी, कंपनियां, गैर सरकारी संगठन, स्वयं सहायता समूह, डेयरी सहकारी समितियां आदि डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत लाभ उठा सकते हैं. उद्यमियों को परियोजना की मंजूरी के लिए बैंकों में आवेदन करना होता है.


अन्य सम्बंधित खबरें