मोदी सरकार का बड़ा फैसला, किसानों को 1350 रुपये में ही मिलेगा DAP का बैग
देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार को अपने एक फैसले से देश के करोड़ों किसानों को बड़ी राहत प्रदान की है. इसके तहत मोदी सरकार ने किसानों को फर्टिलाइजर की बढ़ी कीमतों के बोझ से मुक्त कर दिया है. मोदी सरकार के इस फैसले से देश के किसानों को आगामी खरीफ सीजन के दौरान भी 1350 रुपये में ही डाई अमोनियम फास्फेट (DAP) का एक बैग मिलेगा.
इस संबंध के प्रस्ताव पर बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने मुहर लगाई है. जिसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने दी है. असल में मोदी सरकार ने यह फैसला तब लिया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आपूर्ति चेन प्रभावित होने से कच्चे मॉल की कमी आई है और इससे दुनियाभर में फर्टिलाइजर की कीमतों में बेहताशा बढ़ोतरी हुई है.
कैबिनेट में हुए फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि किसानों को पुरानी कीमत यानी 1350 रुपये में ही DAP का बैग मिलेगा. जबकि सरकार सब्सिडी के तौर पर 2501 रुपये के खर्च का भार उठाएगी.
उन्हाेंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे माल के संकट की वजह से फर्टिलाइजर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. इस वजह से DAP का एक बैग 3851 रुपये का होना चाहिए, लेकिन सरकार किसानों को 1350 रुपये प्रति बैग से ही DAP उपलब्ध कराएगी, बाकी 2501 रुपये की कीमत का भार सब्सिडी के तौर पर उठाएगी. उन्होंने बताया कि पिछले साल सरकार DAP के एक बैग पर 512 रुपये की सब्सिडी दे रही थी. जिसमें इस बार बढ़ोतरी हुई है.
कैबिनेट में फर्टिलाइजर सब्सिडी पर हुए फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि किसानों को DAP के साथ ही अन्य फर्टिलाइजर पर छूट का लाभ भी मिलेगा. उन्होंने इसके लिए सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने इस खरीफ सीजन में सब्सिडी के लिए 60939 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.
जबकि 2013 -14 के खरीफ सीजन में फर्टिलाइजर सब्सिडी के तौर पर 29426 करोड़ रुपये खर्च किए थे. इसी तरह पिछले साल बजट 57150 करोड़ का था. उन्होंने बताया कि 2013 -14 में फर्टिलाइजर सब्सिडी 71280 करोड़ थी, जो इस 162184 करोड़ कर दी गई है.
केंद्र सरकार के इस फैसले से देश के करोड़ों किसानों को बड़ी राहत मिली है. असल में देश की खेती फर्टिलाइजर पर निर्भर है, लेकिन देश में फर्टिलाइजर का उत्पादन बेहद ही कम होता है. वहीं बाकी बचे हुए उत्पादन के लिए भी कच्चे माल के लिए विदेशों पर निर्भरता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर होने वाले उतार चढ़ाव से देश की खेती प्रभावित होती है.