12वीं की किताब से हटाया गया बाबरी मस्जिद का जिक्र, NCERT के निदेशक ने बदलाव को लेकर कही यह बात...
भगवान राम से लेकर श्री राम तक, बाबरी मस्जिद, रथयात्रा, कारसेवा और विध्वंस के बाद की हिंसा की जानकारी को NCERT की नई किताब से हटा दिया गया है. 12वीं क्लास की पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस में कई बड़े बदलाव करते हुए बाबरी मस्जिद की जानकारी हटाने और 'अयोध्या विवाद' को 'अयोध्या मुद्दा' लिखने की बात सामने आई है. बाबरी मस्जिद नाम के बजाय किताब से इसे केवल "तीन-गुंबद संरचना" के रूप में पढ़ाया जाएगा. इसके अलावा, अयोध्या पर अध्याय को चार पेजों से घटाकर दो पेज कर दिया गया है.
NCERT 12वीं राजनीतिक विज्ञान की किताब में ‘भगवान राम का जन्म स्थान माना जाता है’ से संदर्भ बदलकर ‘इसमें श्री राम के जन्म स्थान, सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक और इसके कानूनी स्वामित्व के बारे में विवाद शामिल थे’ कर दिया गया है. यह पहली बार है कि अयोध्या राम जन्मभूमि का संदर्भ लाया गया है क्योंकि ‘भगवान राम’ को बदलकर ‘श्री राम’ कर दिया गया है. यह 2014 के बाद से एनसीईआरटी पुस्तक का चौथा संशोधन है, जो नवीनतम राजनीतिक विकास के आधार पर अपडेट को दर्शाता है. नई किताब 2024-25 शैक्षणिक सत्र के लिए लागू की जाएगी, जिसका उद्देश्य शैक्षिक सामग्री को समकालीन राजनीतिक घटनाओं के साथ जोड़ना है.
सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला हटाकर नया लिखा
नई किताब में 1994 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को साल 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले से बदल दिया गया है. पहले लिखा गया था, "सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश वेंकटचलैया और तत्कालीन न्यायमूर्ति जी एन रे ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की विफलता पर एक फैसले में टिप्पणियां की थी कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद ढांचे की रक्षा के लिए राष्ट्रीय एकता परिषद के समक्ष उन्होंने जो वादा किया था, उसे पूरा करने में विफल रहे, मोहम्मद असलम बनाम भारत संघ, 24 अक्टूबर 1994. कल्याण सिंह को अदालत की अवमानना के अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने पर एक दिन के सांकेतिक कारावास की सजा सुनाई गई थी क्योंकि अवमानना बड़े मुद्दों को उठाती है जो हमारे राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने की नींव को प्रभावित करती है."
किताब में नए बदलावों पर NCERT के निदेशक क्या कहा?
NCERT के निदेशक दिनेश सकलानी ने से जब किताब में नए बदलावों को लेकर कई सवाल किए गए तो उन्होंने इंडिया टुडे से कहा कि किताबों का भगवाकरण करने का कोई प्रयास नहीं है, भगवाकरण क्या है? इसका क्या मतलब है? जब हम किताबें पब्लिश करते हैं तो हम किसी विचारधारा का पालन नहीं करते हैं. एक्सपर्ट्स ने वही किया है जो उन्हें सिलेबस के लिए सही लगा.
बाबरी मस्जिद संदर्भ हटाने पर उन्होंने कहा, 'हमने उस मामले पर ताजा अपडेट के अनुसार काम किया है. सबजेक्ट एक्सपर्ट्स ने विचार-विमर्श किया है और आखिर में बुक पब्लिश की हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले को सुलझा लिया है, नई चीजों के साथ किताब पब्लिश की गई हैं.
12वीं कक्षा में गोधरा दंगों का संदर्भ हटाया गया, इस पर सकलनी ने कहा कि अगर छात्र हिंसा और दंगों पर पढ़ना चाहते हैं, तो उनके बारे में दूसरी बहुत सी स्टडी मेटेरियल है. हमें न केवल रिपीटेशन को कम करना है, बल्कि यह भी देखना है कि आज क्या रिलेवेंट है.