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कलेक्टर के निर्देशन पर ब्लाक मेडिकल ऑफिसर के घर में संचालित क्लिनिक पर छापामर कारवाही, सोनोग्राफी मशीन जप्त.

सालों से निजी प्रैक्टिस करते डॉ दंपत्ति द्वारा नर्सिंग होम एक्ट का उलंघनकिया जा रहा था. जहाँ खुद कानून फॉलो करवाने वाले कानून का उलंघन करते पाये गए. ऐसा ही एक मामला महासमुंद जिले के ब्लाक सरायपाली में प्रकाश में आया है.


सरायपाली के शासकीय ब्लाक मेडिकल ऑफिसर डॉ अमृत रोहेल्डकर अपने आवास में ही हॉस्पिटल खोल कर काफी सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं. मामला बीती रात शुक्रवार की है, जहाँ एक स्थानीय निवासी की शिकायत पर SDM सरायपाली, तहसीलदार और टीम द्वारा छापा मारा कारवाही की गयी और अवैध रूप से हॉस्पिटल में सोनो ग्राफी मशीन जप्त की गई.

इसके पहले जनप्रतिनिधि से लेकर कई संगठन आम जन और कुछ दिनों पहले कांग्रेस के जिला राजीव ब्रिगेड अध्यक्ष जफ़र उल्लाह खान द्वारा कलेक्टर को लिखित शिकायत की थी. जिस पर महासमुंद कलेक्टर सुनील कुमार जैन के निर्देशन पर अनुविभागीय अधिकारी विनय कुमार, तहसीलदार और टीम द्वारा छापेमार कारवाही करते हुए सोनोग्राफी मशीन की जप्ती की है और इस मामले की गहन जाँच की जा रही है.

फ़ोन पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.मंगलुरकर से संपर्क करने और पूछने पर उनका कहना है के इस मामले से वे अनजान है और रही बात सोनोग्राफी मशीन की तो उनका कहना है के डॉ अमृत को पर्मिशन और लाइसेंस प्राप्त है.
मिली जानकारी अनुसार डॉ अमृत की शिकायत कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री और PMO तक की गई है.
ज्ञात हो के डॉ अमृत दंपत्ति हमेशा विवादों में रहे हैं. जिले के ब्लाक सरायपाली में पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से देखने मिल रहा है के कई सरकारी डॉक्टरों और विशेषज्ञ डॉ. की कमी यहाँ बनी रहती है. जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है.

जिले में छोटी-छोटी बीमारी या एक्सीडेंट में शासकीय अस्पतालों को रिफर सेंटर बनाया जा रहा है. 100 बेड का शासकीय अस्पताल आज 30 बेड में सिमट कर रह गई है. वहीँ शासकीय डॉक्टर भी अगर अपने निजी क्लिनिक की तरफ ध्यान देंगे तो ऐसे में गरीब जनता का क्या होगा यह समझा जा सकता है.

अब मामले के प्रकाश में आने के बाद लोगों के मन में काफ़ी सारे सवाल उठने लगें है. क्या सोनोग्राफी मशीन अवैध रूप से खरीदी की गई? इस मशीन से क्या लिंग परिक्षण करते थे? क्या बिना रेडियोलाजिस्ट, MD, DGO के बगैर सोनोग्राफी कर सकते हैं? क्या CMO को इसकी जानकारी नहीं? और क्यों
कानून के तहत जाँच और पालन करवाने वाले ही बार-बार आरोपी बन रहे?


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