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बालाकोट का फैसला इसलिए लिया क्योंकि आतंकवाद जहां से कंट्रोल होता है ‘खेल’ वहीं खेला जाएगा !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि बालाकोट में हवाई हमला करने का फैसला उन्होंने इसलिए लिया कि आतंकवाद जहां से कंट्रोल होता है, ‘खेल’ वहीं खेला जाएगा और अब मैदान भी उन्हीं का होगा।

मोदी ने ‘‘मैं भी चौकीदार’’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यहां कहा कि पाकिस्तान बड़ी मुसीबत में है क्योंकि यदि वह (पाकिस्तान) कहता है कि बालाकोट में कुछ हुआ था तो उसे स्वीकार करना पड़ेगा कि वहां आतंकवादियों का शिविर चलता था।

उन्होंने कहा, ‘‘वे लोग कह रहे हैं कि कोई आतंकवादी शिविर नहीं था। अब उन्हें इसे छिपाना पड़ रहा है । वे अब किसी को वहां नहीं जाने दे रहे हैं। हमें बताया गया है कि पाकिस्तान बालाकोट इलाके का पुनर्निर्माण कर रहा है ताकि वह यह दिखा सके कि वहां एक स्कूल चल रहा है और लोगों को वहां ले जाया जा सके तथा दिखाया जा सके कि वहां कोई आतंकी शिविर नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि जो लोग बालाकोट हवाई हमले पर मोदी को गाली दे रहे हैं वे अपने बयानों से पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं।

यह कार्यक्रम देशभर में 500 स्थानों पर प्रसारित किया गया जहां भाजपा कार्यकर्ता, चौकीदार, व्यापारी, किसान सहित अन्य ने मोदी का संबोधन सुना और वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उनसे बातचीत की।

मोदी ने कहा, ‘‘मैं बालाकोट पर फैसला ले सका क्योंकि अपने सशस्त्र बल पर मुझे भरोसा है। मैंने उन्हें खुली छूट दी क्योंकि मुझे उनके अनुशासन में यह यकीन था कि वे कुछ गलत नहीं कर सकते।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस फैसले के पीछे क्या वजह थी? हम पिछले 40 बरसों से आतंकवाद से पीड़ित हैं। यह पाप किसने किया, रिमोट कंट्रोल कहां है, हर कोई जानता है। आतंकवादियों के आका कहां बैठे हैं, यह सबको पता है। वे आते हैं और मार कर चले जाते हैं...।’’

मोदी ने मुंबई और उरी आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए यह कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘...फिर मैंने फैसला किया कि यह जहां से कंट्रोल होता है, ‘खेल’ वहीं खेला जाएगा। और अब मैदान भी उन्हीं का होगा।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने हवाई हमले के डेढ़ महीने बाद अब जाकर अपने हवाई क्षेत्र को खोलना शुरू किया है क्योंकि उसे लगता है कि मोदी अब चुनाव में व्यस्त हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि हमला एक ऐसे स्थान पर किया गया, जहां पाकिस्तान द्वारा आतंकी शिविर चलाने की बात ज्ञात थी। पाकिस्तान को इस बात से परेशानी नहीं है कि कितने आतंकी मारे गए, बल्कि यह ठप्पा पक्का होने से परेशानी है कि वे आतंकी शिविर चला रहे थे।

गौरतलब है कि 26 फरवरी को पाकिस्तान के अंदर घुस कर बालाकोट के पास जैश ए मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर भारतीय वायु सेना के बम गिराने के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ गया था।

पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अगले दिन भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की नाकाम कोशिश की थी।

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के एक काफिले पर हुए आतंकी हमले में 40 जवानों के शहीद होने के बाद भारत ने जैश के शिविर पर हमला किया था।

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