पाट जात्रा के साथ शुरू हुआ 75 दिवसीय विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा
जगदलपुर : हरियाली अमावस्या के मौके पर बुधवार को मां दंतेश्वरी मंदिर के सामने पाट जात्रा पूजा विधान के साथ ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व का आगाज हो गया। करीब 75 दिनों तक चलने वाले इस पर्व की पहली रस्म ठुरलू खोटला की पूजा के साथ पूरी की गई।
पाट जात्रा के पूजा विधान में महापौर संजय पांडे, कलेक्टर आकाश छिकारा समेत जनप्रतिनिधि, बस्तर दशहरा समिति के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता, पटेल, नाईक-पाईक और सेवादारों के साथ बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा की शुरुआत पाट जात्रा से होती है। इस दौरान रथ निर्माण में इस्तेमाल होने वाले औजारों, विशेष रूप से ठुरलू खोटला की पारंपरिक विधि-विधान से पूजा की गई। पूजा के साथ बस्तर दशहरा के निर्विघ्न और सफल आयोजन की कामना की गई।
महापौर संजय पांडे ने बताया कि पाट जात्रा के साथ 75 दिवसीय बस्तर दशहरे की शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि इस रस्म में वन देवी की पूजा और क्षमा याचना के बाद विशेष जंगल से लकड़ी लाई जाती है। हरियाली अमावस्या के दिन पारंपरिक विधान के तहत रथ निर्माण में इस्तेमाल होने वाले औजारों की पूजा की जाती है, जिसे ठुरलू खोटला की रस्म कहा जाता है।
वहीं कलेक्टर आकाश छिकारा ने कहा कि पाट जात्रा की रस्म परंपरागत विधि-विधान के साथ संपन्न हुई और इसी के साथ विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की शुरुआत हो गई है।
चालकी पदम राम पोयाम ने बताया कि ठुरलू खोटला की रस्म के साथ 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरे का शुभारंभ हुआ है। इस दौरान रथ निर्माण से जुड़े औजारों की पूजा कर पर्व के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना की गई।
पाट जात्रा की पहली रस्म के साथ शुरू हुआ बस्तर दशहरा अगले 75 दिनों तक बस्तर की संस्कृति, परंपरा और आस्था का अनूठा संगम पेश करेगा।