भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को ... - CG Sandesh

भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को चुनौती देता जनसंपर्क विभाग, पीजीपोर्टल, जनशिकायत, सीएमहेल्पलाइन लाइनपर की गई शिकायत सब बेअसर

छतीसगढ़ में सरकार के काम काज और योजनाओं को प्रचार करने वाले विभाग में भ्रष्टाचार का दीमक लग गया है.  यह दीमक इस कदर फ़ैल गया है कि अब ईमानदारी की नींव भी डगमगाने लगी है.  क्योंकि इस विभाग में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत आने वाले प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के ऑनलाइन पोर्टल pgportal.gov.in पर की गई शिकायत की भी कोई कार्रवाई नहीं होती है.

विभाग में भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है कि आये दिन भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा या अपारदर्शिता की शिकायतें आती रहती हैं, फर्जी वेबसाइट्स, आउटडोर प्रचार से लेकर सोशल मीडिया और पीआर एजेंसियों का अत्यधिक भुगतान बिना किसी वास्तविक प्रभाव या रीच के कर दिया जाता है.

हमारे द्वार फर्जी यूजर के आधार पर वेबसाइट्स को दिए जा रहे विज्ञापन की शिकायत pgportal.gov.in पोर्टल पर 17 नवम्बर 2025 को की गई थी, जिसपर लोक शिकायत विभाग ने 20 नवम्बर 2025 को जाँच के लिए इसे छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग को भेजा था, लेकिन उसपर कोई कार्रवाई नहीं ही गई.

इसी तरह 16 नवम्बर 2025 को इसी मामले मे छत्तीसगढ़ जनशिकायत निवारण विभाग छत्तीसगढ़ में शिकायत की गई, जिसका आवेदन क्रमांक 791225013320 है. छत्तीसगढ़ जनशिकायत निवारण विभाग में ऑनलाइन शिकायत के बाद इसे आवश्यक कार्यवाही हेतु 08 जनवरी 2026 को महासमुंद कलेक्टर के पास भेजा, महासमुंद कलेक्टर ने इसे जिला जनसंपर्क कार्यालय भेज दिया इसके बाद 21 मई 2026 को जिला जनसंपर्क कार्यालय ने उपरोक्त सम्बन्ध में कार्यवाही जिला स्तर से सम्बंधित नहीं होना कहकर इसे वापस भेज दिया, जिसके बाद इसे जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक के पास भेज दिया गया. और वहां कार्रवाई रोक दी गई.

इस तरह इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो एवं आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो EOW से भी शिकायत की गई थी. जिसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने 10 अप्रैल 2026 को इसे कार्रवाई हेतु जनसंपर्क विभाग के सचिव को भेज दिया, जिसमे भेजे गए पत्र का क्रमांक ब्यूरो / शिका. / आर. 240(26) / m-6198 है. लेकिन इसपर भी आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

और जब एंटी करप्शन ब्यूरो एवं आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसियां भी मामले को जांच के लिए उसी विभाग के 'सचिव' को प्रेषित कर देती हैं, तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है, क्योंकि जिस विभाग पर आरोप हैं,  क्या वही विभाग खुद अपनी जांच कर पायेगा ?

हमने आरटीआई के माध्यम से मिली एक जानकारी के आधार पर भेज गए सभी शिकायतों पर किसी तीसरी डिजिटल मार्केटिंग कंपनी से निष्पक्ष जाँच की मांग की थी, और बताया था कि 70 प्रतिशत फर्जी यूजर वाली वेबसाईट को 40 से 50 हजार का प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है. इसके चलते स्थानीय और मेहनत करने वाले पोर्टलों को नजरअंदाज किया जा रहा है, वहीँ विभाग ने विगत 2 वर्षों ने इम्पैनलमेंट बंद कर पारदर्शिता भी खत्म कर दी है. विभाग द्वारा मनमानी कर विज्ञापन जारी किया जा रहा है.

इतने पोर्टल पर कारवाही नहीं होने के बाद मुख्यमंत्री ने एक नया पोर्टल लांच किया cmhelpline.cg.gov.in जोर शोर से इसका प्रचार किया गया, बताया गया कि 7 से 15 दिवस के भीतर इसपर कारवाई हो जाती है. इसके बाद इस पोर्टल पर भी हमने भरोसाकर अपना समय व्यर्थ करना 23 जून 2026 को किया. जहाँ WP260600039478 का टोकन नंबर दिया गया.  

इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद शिकायत निराकरण अधिकारी (ऐल1) से संपर्क कर शिकायत दे दी गयी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से एल3 अधिकारी के पास इसे भेज दिया गया. जहाँ पर भी समय के साथ कारवाही नहीं होने से SLA उल्लंघन के बाद शिकायत एल4 अधिकारी को सौंप दी गई है और कार्य प्रगति पर है.

एल4 विभाग के सचिव है, जिनके पास पूर्व में 10 अप्रैल को ही एंटी करप्शन ब्यूरो एवं आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने जाँच के लिए पत्र भेज दिया था. सचिव किसी भी विभाग के सर्वोच्च अधिकारी होते हैं, उनतक शिकायत पत्र भेजे जाने बाद अगर कारवाई नहीं होती तो क्या इसपर कारवाई ना करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन का दबाव है समझा जाए ? आपको बता दें कि जनसंपर्क विभाग मुख्यमंत्री का विभाग है. जो भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की बात करते हैं और उनका विभाग भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस की नीति को चुनौती दे रहा है, क्या इस विभाग को भ्रष्टाचारियों ने हाईजैक कर लिया है. क्या इस सरकार में शांति के तरीके से पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग करने से उसे बेकार समझा जाता है. ?  क्या cmhelpline पोर्टल पर केवल ड्राविंग लाइसेंस, आधार कार्ड और राशनकार्ड ही बनाये जायेंगे ?

इस जाँच पर कार्यवाही जानने के लिए हमने आरटीआई में माध्यम से भी आवेदन किया, जिसका जवाब नहीं मिलने अब इसपर आगे अपील की जा रही है.

अब क्या प्रधानमंत्री को स्वयं कार्रवाई करने के लिए आना पड़ेगा, ऐसा सिर्फ जनसंपर्क विभाग में नहीं हो रहा है, दरअसल सराकर का शायद ब्यूरोक्रेट्स पर नियंत्रण ही नहीं है, ऐसे में ये समझ नहीं आता की ये ब्यूरोक्रेट्स सरकार को गलत रिपोर्ट देते होंगे या फिर सरकार भ्रम में रखते होंगे.

शायद सरकार पर अफसर शाही हावी है इसलिए ही धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, जो सरकार अधिकारीयों पर ही नियंत्रण ना रख पाए ऐसी सरकार नहीं चाहिए. पहले भ्रष्टाचार को लेकर लोगो के मन में शंका बनी रहती थी, लेकिन आज लोग ऐसा समझने लगे है कि हर काम में भ्रष्टाचार के नाम पर कमीशनखोरी जारी है. क्या नेता और अधिकारी ठेकेदारों के लिए दलाली का काम कर रहे हैं ? अपने स्वार्थ के लिए लोगों के टैक्स का पैसा बर्बाद कर रहे हैं, और फिर कहते हैं किसानों की कर्जमाफी से देश की अर्थव्यवस्था का बुरा हाल है.

यह स्पष्ट होता है कि केवल ऑनलाइन शिकायत पोर्टल बना देने से पारदर्शिता नहीं आती, जब तक कि जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई न हो. कागजी पत्राचार के आगे यदि प्रशासनिक चुप्पी बनी रहती है, तो न्याय के लिए लोगों को भटकना पड़ता है.


author

अविनाश नायक

मैं डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ और टेक-सैवी पत्रकार हूँ, जो पिछले 9 वर्षों से छत्तीसगढ़ सहित महासमुंद, सरायपाली, बसना और पिथौरा क्षेत्र की स्थानीय खबरों के साथ, देश-विदेश एवं शासकीय योजनायें, रोजगार अथवा बैंकिंग से सम्बंधित समाचार प्रकाशित करता हूँ। पत्रकारिता के साथ-साथ मुझे Windows VPS सर्वर, IIS कॉन्फ़िगरेशन, SQL सर्वर और MVC, .NET, C# जैसी एडवांस तकनीकों का गहरा व्यावहारिक अनुभव है. इसके पूर्व करीब 6 वर्ष तक का मेरा सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामर के रूप में अनुभव रहा है.
अन्य सम्बंधित खबरें