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10 आसियान देशों के प्रमुख रहे गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि

आसियान भारत के 25 साल के मैत्री संबंध को नया आयाम दिया भारत ने. देश के 69वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर देश की आन-बान-शान का अनूठा नजारा पेश हुआ, तो साथ ही कूटनीति के लिहाज से भी नया अध्याय रचा गया.

देश की सैन्य और सांस्कृतिक विविधिता का नजारा दुनिया ने देखा तो पीएम मोदी की कूटनीति भी साफ दिखी. देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब 10 आसियान देशों के राष्ट्र-प्रमुखों और शासनाध्यक्षों ने भारत की गौरव गाथा को ऐतिहासिक राजपथ पर देखा.

राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में सलामी मंच पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ब्रूनेई के सुल्‍तान हाजी-हसनल-बोल्किया मुइज्‍जाद्दीन वदाउल्‍लाह, इंडोनेशिया के राष्‍ट्रपति जोको विदोदो, फिलीपींस के राष्‍ट्रपति रोड्रिगो रोआ डूतरेत, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग, मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो स्री मोहम्‍मद नजीब बिन तुन अब्‍दुल रज़ाक, थाईलैंड के प्रधानमंत्री जनरल प्रयुत छान-ओ-चा, म्‍यामां की स्‍टेट काउंसलर आंग सांग सू ची, वियतनाम के प्रधानमंत्री नग्‍युएन जुआन फूक और लाओ पीडीआर के प्रधानमंत्री थोंगलोंन सिसोलिथ मौजूद रहे.

राजपथ पर परेड देखने के लिए पहुंचने पर इन नेताओं की अगवानी के लिए खुद पीएम मोदी मौजूद थे. खास बात ये रही कि इन विशिष्ट अतिथियों के गले में एक ही तरह की जयपुरी चुन्नी पड़ी हुई थी. इन सभी मेहमानों के लिए राजपथ पर पहली बार विशेष तौर पर 100 फीट का सलामी मंच बनाया गया था. ये सभी मेहमान परेड को गौर से देखते नजर आए.

परेड के दौरान पीएम मोदी अपने पास बैठे सिंगापुर के प्रधानमंत्री के साथ कई बार गुफ्तगू करते दिखे. आयकर विभाग के स्वच्छ धन अभियान की झांकी के दौरान दोनों काफी देर तक चर्चा करते रहे. इसी प्रकार जब गुजरात की झांकी सलामी मंच के सामने से गुजरी तब भी पीएम मोदी और लूंग कु बात करते नजर आए.

पीएम ने ट्वीट करके इन अतिथियों के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने पर आभार जताया. पीएम ने लिखा, ‘गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेने के लिए आसियान के नेताओं का धन्यवाद.’

गणतंत्र दिवस के समारोह में 10 राष्ट्राध्यक्षों को मुख्य अतिथि बनाना एक तरह का रिकॉर्ड तो है ही, यह इसलिए भी खास है कि इस साल भारत-आसियान दोस्ती के 25 साल पूरे हुए हैं. आसियान नेताओं की उपस्थिति एक इस क्षेत्र के साथ भारत के निरंतर गहरे होते संबंधों और भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. भारत की एक्ट ईस्ट नीति दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ उसके प्रचीन संबंधों को बेहतर बनाने के साथ ही राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को पुन: स्थापित करती है. गुरुवार को ही ये नेता आसियान-भारत मैत्री शिखर बैठक में शामिल हुए. गुरुवार को ही इन दस देशों में से प्रत्येक के यहां के एक-एक व्यक्ति को उसके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म अलंकरणों से विभूषित करने की घोषणा की गई. कुल मिलाकर इन अतिथियों ने केवल समारोह के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा, बल्कि आसियान-भारत संबंधों की नई इबारत भी लिखी है.

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