गणतंत्र दिवस समारोह में राजपथ पर दिखी देश की आन-बान-शान
69वें गणतंत्र दिवस पर भारत ने राजपथ पर अपनी सांस्कृतिक धरोहर एवं विविधताओं के साथ सैन्य और स्त्री शक्ति का ऐसा अद्भुत प्रदर्शन किया जिसे देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा उठ गया. इस मौके पर भारतीय इतिहास में पहली बार आसियान के दस देशों के राष्ट्राध्यक्ष एक साथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए.
देश के 69वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर फहराता तिरंगा देश की आन, बान और शान का प्रतीक है. राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दस आसियान देशों के प्रमुखों की मौजूदगी के बीच देश ने राजपथ पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करके दुनिया को एक बार फिर से अपनी ताकत का एहसास कर दिया.
समारोह शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी. रंग-बिरंगी बांधनी पाई का साफा बांधे पीएम ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद वहां रखी पुस्तिका में अपने विचार लिखे.
मेहमानों के आने के बाद कार्यक्रम की शुरुआत हुई और सबसे पहले राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने तिरंगा फहराया. राष्ट्रगान की धुन के बीच 21 तोपों की सलामी हुई और इसके बाद परेड शुरू हुई.
इस दौरान विजय चौक से ऐतिहासिक लाल किले तक देश की आन-बान-शान का शानदार नजारा देखा गया, जिसमें प्राचीन काल से चली आ रही भारत की अनूठी एकता में पिरोई विविधताओं वाली विरासत, आधुनिक युग की विभिन्न क्षेत्रों की उसकी उपलब्धियां और देश की सुरक्षा की गारंटी देने वाली फौज की क्षमता का भव्य प्रदर्शन हुआ. इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड की ख़ासियत मुख्य अतिथि के रूप में आसियान के 10 देशों के नेताओं एवं शासनाध्यक्षों की मौजूदगी रही.
परेड का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल असित मिस्त्री ने किया. इस दौरान तमाम रेजीमेंट के जवानों और बैंड दस्ते ने सधे कदमों के साथ प्रस्तुति दी. परेड के दौरान एक टुकड़ी ने आसियान देशों के ध्वज को लेकर मार्च किया. इसमें 61वीं कैवेलरी दस्ता ने हिस्सा लिया.
सबसे अंत में रोमांच से भर देने वाले वायु सेना के अत्याधुनिक विमानों को राजपथ के उपर से हैरतअंगेज कारनामों के साथ उड़ान भरते देख कर उन विमानों की ताकत के साथ ही वायु सेना के पायलटों का हुनर और जांबाजी का अहसास हुआ. सुखोई-30 एमकेआई विमानों ने त्रिशूल फॉर्मेशन पेश किया, जबकि तेजस विमानों ने 'विक्ट्री फॉर्मेशन’ पेश किया. इसके अलावा मिग-29 विमानों ने 'एयरो हेड फॉर्मेशन' प्रस्तुत किया. सुखोई-30 विमानों के बीच में सी-17 ग्लोब मास्टर ने प्रस्तुति दी. इसके अलावा सी130जे हरक्युलियस विमानों एवं जगुआर विमानों ने भी परेड में हिस्सा लिया.
गणतंत्र दिवस परेड में ही नहीं बल्कि उसे देखने आए देश के हर क्षेत्र, समुदाय, जाति और धर्म के उमड़े जनसैलाब ने अनेकता में एकता के जज़्बे का अनूठा प्रदर्शन किया. परेड के 8 किलोमीटर के रास्ते में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और वृद्धों के चेहरों की चमक और उत्साह देखते ही बनता था.
परेड में जहां सारी दुनिया में सबसे अधिक विविधता वाले देश भारत को एक सिरे में पिरोने वाली उसकी हर कोने की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाया. वहीं अत्याधुनिक हथियारों, मिसाइलों, विमानों और भारतीय सैनिकों के दस्तों ने देश के किसी भी चुनौती से निपट सकने की ताकत का अहसास कराया.