अस्पताल बंद, झाड़ फुक का सहारा लेने मजबूर हुए ग्रामीण.
हेमन्त वैष्णव / हीरा लाल तिवारी - उमरिया बरसात आते ही जहरीले जीव जंतुओं का खतरा अक्सर ग्रामीणों को सताता रहता है, मगर शासन की दुर्दशा ऐसी है की जहाँ अस्पताल है आज वहां के ग्रामीण भी पुराने ज़माने के झाड़ फूंक से अपने जीवन बचाने को निर्भर है और कहा जाए तो यह एक मात्र उनका सहारा है अब उन्हें ना शासन से ना प्रशासन से कोई उम्मीद है.
अब से करीब चार माह पूर्व अप्रैल 2019 में सीजी संदेश डॉट कॉम पर उमरिया में बीते 15 दिनों से ताला लगने की ख़बर का प्रकाशन किया था मगर आज तक उस खबर का कोई असर होता नहीं दिख रहा. मानवता के नाम पर तबादले किये गए स्वास्थ कर्मी की पीड़ा आज भी उस गाँव के लोग झेल रहे है.
फिलहाल बरसात के मौसम में सांप और बिच्छूओं सहित अन्य कीटों का हमला इंसानों पर होता ही रहता है. शहरी इलाकों में सांप और बिच्छू भले ही कम निकलते हो. लेकिन गांवों में ये कहीं भी देखने को मिल जाते है. बरसात में जैसे ही बारिश का पानी सांप के बिल तक पहुंचता है वैसे ही बिलों में छिपे हुए सांप बाहर निकल आते हैं. ग्रामीण इलाकों में सांपों के बिल मानव बस्तियों के आसपास होते हैं. इसलिए सर्पदंश का सबसे अधिक हमला भी उन्हीं पर होता है. बारिश के दिनों में सांप, बिच्छू से लेकर तमाम जहरीले जीव जंतु सक्रिय हो जाते हैं. बारिश के पानी से अपनी जान बचाने के लिए ये भी सुरक्षित जगह तलाशने लगते हैं. ये जगह आपका घर, गलियारा, घर का कोना या फिर लकड़ी का ढेर कुछ भी हो सकता है.
बसना ब्लॉक के ग्राम पंचायत उमरिया स्वास्थ केंद्र में 5 ग्राम पँचायत के 10 गांव सहित 6 हजार ग्रामीण लोग इसपर आश्रीत है लेकिन इन दिनों भी यहाँ ताला लटका हुआ है.
सरायपाली उमरिया नवभारत संवाददाता हीरा लाल तिवारी ने बताया कि परसो रात एक बिच्छू के डंक मारने के कारण रात उप स्वास्थ्य केंद्र गए जहां उप स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका हुआ था, मौके पर जिम्मेदार अधिकारियों को भी फोन लगाया लेकिन किसी ने जवाब नही दिया. जिसके बाद गांव में झाड़ फूक का सहारा लेना पड़ा.
आपको बता दें कि उमरिया को रुर्बन मिसन में चयनित होने के बावजूद स्वास्थ सुविधा उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है तो अति पिछड़े हुए इलाक़ो में क्या हाल होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.
स्वास्थ विभाग के लगातर लापरवाही के कारणों के चलते कई बार ग्रामीण इलाज से वांछित रह जाते है जिसके कारण आस पास के ग्रामीणों में भारी रोष है. मगर इसके बावजूद स्वास्थ विभाग उक्त स्वास्थ कार्यकर्ता को उमरिया नही भेज रहें है.